CM Mohan Yadav : भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को शामिल किया है। मंगलवार को उन्होंने मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर तक इलेक्ट्रिक वाहन से यात्रा कर स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल हुई EV कार
मध्य प्रदेश में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने अपने नियमित उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहन को काफिले का हिस्सा बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अब कई आधिकारिक यात्राओं में इसी वाहन का उपयोग करेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईंधन की बचत को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल नई इलेक्ट्रिक कार को MP-02-VB-2047 पंजीयन क्रमांक मिला है। इसमें “VB” का मतलब विकसित भारत है, जबकि “2047” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य वर्ष का प्रतीक माना जा रहा है।
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पहले घटाया काफिला, अब EV को दिया बढ़ावा
मुख्यमंत्री मोहन यादव इससे पहले भी ईंधन बचत को लेकर कई कदम उठा चुके हैं। उन्होंने अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या को कम किया था। पहले जहां मुख्यमंत्री के काफिले में 13 वाहन शामिल रहते थे, वहीं अब इसे घटाकर 5 वाहनों तक सीमित कर दिया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार काफिले में वाहनों की संख्या कम होने से डीजल की खपत में भी उल्लेखनीय कमी आई है। इससे सरकारी खर्च घटाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत आज समय की जरूरत है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने स्तर पर प्रयास करने चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग न सिर्फ प्रदूषण कम करता है, बल्कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह एक बेहतर विकल्प भी है।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री की यह पहल आम लोगों को भी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए प्रेरित करेगी। इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब देशभर में पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।