Water Crisis Betul : बैतूल। बैतूल जिले से सटे महाराष्ट्र सीमा के अंधेर बावड़ी गांव में भीषण पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गांव के लोगों को पीने के पानी के लिए रोज घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को कुएं में उतरकर जान जोखिम में डालते हुए पानी निकालना पड़ रहा है।
पानी की किल्लत को लेकर महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है।
“मजदूरी करें या पानी भरें”
गांव की एक बुजुर्ग महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि गरीब लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे मजदूरी करें या पानी भरने में पूरा दिन लगाएं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, लेकिन पानी की स्थायी व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी।
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में वर्षों से पेयजल संकट बना हुआ है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकल पाया है।
कुएं में उतरकर निकालना पड़ रहा पानी
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के निचले ढाने में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां महिलाएं और पुरुष दूर-दूर से पानी लाने के लिए मजबूर हैं।
गांव में मौजूद एकमात्र कुएं से पानी निकालने के लिए लोगों को कुएं के अंदर उतरना पड़ता है। एक व्यक्ति नीचे जाकर बाल्टियों में पानी भरता है, जबकि ऊपर खड़े लोग रस्सियों की मदद से पानी खींचते हैं।
इसके बाद लोगों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
300 मकानों के गांव में नहीं पहुंची नल-जल योजना
ग्रामीण अक्षय के मुताबिक गांव में करीब 300 मकान हैं और अधिकांश लोग फॉरेस्ट चौकी क्षेत्र में रहते हैं। इसके बावजूद गांव में अब तक हर घर नल-जल योजना का काम शुरू नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों को मेंढ़ा डैम से पानी सप्लाई की योजना की जानकारी दी गई थी, लेकिन उसका कोई असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।
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तीनों हैंडपंप बंद, बढ़ी परेशानी
गांव में लगे तीनों हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, जिससे पानी का संकट और गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि रोज घंटों लाइन में लगने के कारण मजदूरी और दूसरे काम प्रभावित हो रहे हैं।
कई लोगों का पूरा दिन सिर्फ पानी जुटाने में ही निकल जाता है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।