Bengal Election BJP Strategy: कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार सिर्फ बड़े नेताओं की रैलियों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि जमीनी स्तर पर बेहद आक्रामक और संगठित रणनीति अपनाई। पार्टी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की। बीजेपी की पूरी रणनीति माइक्रो-मैनेजमेंट और बूथ स्तर की तैयारी पर केंद्रित रही।
संघ और ABVP को मैदान में उतारा
बीजेपी ने अपने वैचारिक संगठनों को सीधे चुनावी मैदान में सक्रिय किया। संघ के स्वयंसेवकों ने गांव-गांव छोटी बैठकें कर लोगों से संपर्क साधा। इन बैठकों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सुरक्षा और स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। वहीं ABVP ने पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को निशाना बनाया। कॉलेज कैंपस और मोहल्लों में जाकर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं से संवाद किया गया।
बीजेपी ने “मेरा बूथ, सबसे मजबूत” रणनीति के तहत हर मतदान केंद्र पर 20 से 30 कार्यकर्ताओं की टीम बनाई। इनका काम मतदाताओं से लगातार संपर्क रखना, मतदान के दिन उन्हें बूथ तक पहुंचाना और स्थानीय मुद्दों की रिपोर्ट ऊपर तक भेजना था। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य हिंदी भाषी राज्यों से अनुभवी कार्यकर्ताओं को बंगाल भेजा गया, जिन्होंने जिलों में डेरा डालकर संगठन को मजबूत किया।
मतुआ और राजबंशी वोटरों पर नजर
बीजेपी ने अनुसूचित जाति और सीमावर्ती इलाकों के वोटरों पर खास फोकस किया। मतुआ समाज और राजबंशी समुदाय को साधने के लिए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को बड़ा मुद्दा बनाया गया। पार्टी ने संकेत दिया कि सत्ता में आने पर इन समुदायों की मांगों को प्राथमिकता दी जाएगी। यही वजह है कि सीमावर्ती जिलों में बीजेपी ने सबसे ज्यादा ताकत झोंकी।
महिला वोटरों के लिए अलग रणनीति
बीजेपी ने संदेशखाली जैसे मुद्दों को महिला सुरक्षा से जोड़ते हुए प्रचार किया। महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं को घर-घर भेजा गया। महिलाओं को यह संदेश देने की कोशिश हुई कि राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर है और बदलाव जरूरी है। बीजेपी की नजर TMC के साइलेंट महिला वोट बैंक पर रही।
सोशल मीडिया से नैरेटिव वॉर
चुनाव में डिजिटल प्रचार भी बीजेपी की बड़ी ताकत बना। हजारों व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पेज और लोकल डिजिटल टीमों के जरिए भ्रष्टाचार, कटमनी और हिंसा से जुड़े मुद्दे उठाए गए। साथ ही विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे बंगाल के महान चेहरों को प्रचार में शामिल कर खुद को बंगाल की संस्कृति से जोड़ने की कोशिश की गई।
केंद्रीय मंत्रियों की क्लस्टर तैनाती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की रैलियों के अलावा बीजेपी ने दर्जनों केंद्रीय मंत्रियों को छोटे शहरों और जिलों में भेजा। ये नेता कई दिनों तक स्थानीय स्तर पर रहे, कार्यकर्ताओं से मिले और संगठन को मजबूती दी।
कुल मिलाकर क्या है बीजेपी का गेमप्लान?
इस बार बीजेपी की रणनीति ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर रही। जहां TMC सरकारी योजनाओं और सत्ता के दम पर चुनाव लड़ रही है, वहीं बीजेपी ने बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, वोटरों से सीधा संपर्क बनाने और बदलाव का माहौल तैयार करने पर जोर दिया। यही वजह है कि बंगाल चुनाव 2026 देश के सबसे दिलचस्प मुकाबलों में गिना जा रहा है।