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Bhopal news : नकली परमिट केस में बड़ा झटका, सोम डिस्टलरीज के डी-1 से FL-9 तक सभी लाइसेंस सस्पेंड

भोपाल। मध्य प्रदेश में नकली परमिट और अवैध शराब परिवहन के मामले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने सोम डिस्टलरीज समूह के सभी प्रमुख लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश 4 फरवरी 2026 से लागू हो गया है।

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आदेश के तहत सोम डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड, सेहतगंज (रायसेन) और सोम डिस्टलरीज एंड ब्रेवरीज, रोजराचक (रायसेन) के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं। इसमें डी-1, एफएल-9, सीएस-1 सहित कंपनी के सभी अहम लाइसेंस शामिल हैं।

कोर्ट में आरोप साबित, दोषसिद्धि बरकरार

इस मामले में देपालपुर की अपर सत्र न्यायालय ने नकली शराब परिवहन परमिट तैयार करने के आरोपों को सिद्ध माना है। कोर्ट में यह साबित हुआ कि कंपनी द्वारा कूटरचित दस्तावेज और फर्जी बिल्टी का इस्तेमाल किया गया। साथ ही शासन को राजस्व नुकसान पहुंचाने और कंपनी को अवैध रूप से लाभ पहुंचाने की साजिश भी उजागर हुई।

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अदालत ने कंपनी के निदेशक और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता को दोषी करार दिया है। कई आरोपियों को कारावास और अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है। हालांकि हाईकोर्ट ने सजा पर फिलहाल रोक लगाई है, लेकिन दोषसिद्धि का आदेश अब भी प्रभावी है। इसी आधार पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की गई है।

आबकारी अधिनियम के उल्लंघन का मामला

आदेश में साफ किया गया है कि यह पूरा मामला आबकारी अधिनियम की धारा 31(1)(ख) और (ग) का उल्लंघन है। वहीं धारा 44 के तहत कंपनी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है। इसी कानूनी प्रावधान के तहत सभी प्रमुख लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं।

आबकारी विभाग के अफसरों पर भी गिरी गाज

इस केस में विभागीय लापरवाही भी सामने आई है। आबकारी उपनिरीक्षक प्रीति गायकवाड को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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अवैध शराब नेटवर्क पर बड़ा प्रहार

प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अवैध शराब नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई है। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि नकली परमिट, अवैध शराब परिवहन और राजस्व चोरी के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अन्य शराब कंपनियों के लिए भी कड़ा संदेश मानी जा रही है।

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