IAS Santosh Verma Controversy : भोपाल। मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद अब हाईकोर्ट पर सीधी चोट की है। एक सभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज बनने से रोकने वाला कोई और नहीं, बल्कि हाईकोर्ट ही है।
आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने यह भी जोड़ा कि यही हाईकोर्ट है, जहां से हम बाबा साहब अंबेडकर के संविधान के अनुसार चलने की गारंटी मांगते हैं। इस बयान के वीडियो के वायरल होते ही पूरे राज्य में माहौल गरम हो गया है। पहले से ही विवादों में घिरे वर्मा के खिलाफ अब सवर्ण संगठनों का गुस्सा चरम पर है।
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यह बयान अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) के एक सम्मेलन में दिया गया। वर्मा ने कहा, “आपको पता है कि हाल के एग्जाम में एससी-एसटी के लोग सिलेक्ट नहीं हुए। उन्हें योग्य उम्मीदवार नहीं मिले। हमारे समाज का व्यक्ति आईएएस, आईपीएस, डिप्टी कलेक्टर या डीएसपी बन सकता है, लेकिन सिविल जज क्यों नहीं?”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि एससी-एसटी के बच्चे क्लैट क्लियर करने के बाद एलएलबी, एलएलएम करते हैं और 75 प्रतिशत से ज्यादा मार्क्स लाते हैं, फिर भी सिविल जज परीक्षा में जानबूझकर 49.95 या इंटरव्यू में 19.5 नंबर दिए जाते हैं। वर्मा ने सवाल उठाया, “यह कौन सा आरक्षण है? यह हाईकोर्ट ही कर रहा है, जिससे हम न्याय की उम्मीद करते हैं।”
वर्मा ने चेतावनी भी दी कि ज्यूडिशरी में एससी-एसटी का ‘बीज’ खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा, “जब हमारा बेटा सिविल जज बनेगा, तभी हाईकोर्ट का जज बनेगा। अगर बीज ही खत्म हो गया, तो न्याय की उम्मीद किससे करेंगे? यह हमारी आखिरी पीढ़ी है, इससे लड़ना हमारा फर्ज है।”
यह बयान 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अजाक्स के प्रांतीय सम्मेलन में आया, जहां वर्मा को अध्यक्ष चुना गया था। उसी सम्मेलन में उन्होंने ब्राह्मण बेटियों पर कहा था, “जब तक मेरा बेटा किसी ब्राह्मण की बेटी से संबंध न बनाए या कन्यादान न हो, तब तक आरक्षण जारी रहे।”
इन बयानों से सवर्ण समाज में भारी आक्रोश फैल गया है। ब्राह्मण संगठनों का कहना है कि वर्मा संवैधानिक मर्यादा तोड़ रहे हैं और महिलाओं का अपमान कर रहे हैं। सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए सवर्ण समाज ने 14 दिसंबर को भोपाल में सीएम हाउस घेराव का ऐलान किया है।
सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन बगावत’ और ‘ऑपरेशन अस्मिता’ नाम से अपील जारी की गई है। इसमें कहा गया, “हमारे धर्म, संस्कृति और अस्मिता पर छींटाकशी अब बर्दाश्त नहीं।
एससी-एसटी एक्ट जैसे काले कानूनों का विरोध करेंगे। सारे काम छोड़कर भोपाल पहुंचें।” सवर्ण समाज की मुख्य मांगें हैं- वर्मा जैसे लोगों को सजा, एससी-एसटी एक्ट समाप्ति, सत्ता की मनमानी बंद और धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई।
11 दिसंबर को भोपाल में सभी ब्राह्मण संगठनों की बैठक हो रही है, जहां आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। मंत्रालय अधिकारी कर्मचारी सेवा संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा, “वर्मा के बयान से पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन सरकार चुप है।
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अब एक और वीडियो आया जिसमें वे कह रहे हैं- ‘कितने संतोष वर्मा को मारोगे, जलाओगे? हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा।'” नायक ने इसे उकसावे वाला बताया।
सनातन प्रचारक हर्षा रिछारिया ने वर्मा के बयानों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “वर्मा के घर में बेटी नहीं है क्या? उनके समाज को ही विरोध करना चाहिए। वे कहते हैं हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा, तो हम कहते हैं हर ब्राह्मण घर से दुर्गा, काली निकलेगी।
फिर भारत में महाभारत होगा।” रिछारिया ने जोड़ा, “बेटी किसी भी जाति की हो, बेटी तो बेटी है। ऐसी सोच समाज को क्या दिशा देगी? हम स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।”
मध्य प्रदेश सरकार ने 26 नवंबर को वर्मा को शो-कॉज नोटिस जारी किया था, जिसमें सात दिन में जवाब मांगा गया। वर्मा ने आठ दिन बाद जवाब दिया, लेकिन अब 11 दिन बीत चुके हैं और कोई कार्रवाई नहीं हुई।
विपक्षी नेता और सवर्ण संगठन इसे वोट बैंक की राजनीति बता रहे हैं। राज्य में कई जगहों पर वर्मा के पुतला दहन हो चुके हैं। यह विवाद अब जातिगत तनाव को बढ़ा सकता है, इसलिए प्रशासन सतर्क है।