Bhopal News : भोपाल। मध्यप्रदेश में अगले निकाय चुनाव (2027) में पार्षद, महापौर, नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष बनने की राह पहले से कहीं ज्यादा सख्त और पारदर्शी होने जा रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने नया नोटिफिकेशन जारी करके लोकसभा-विधानसभा चुनाव जैसे ही कड़े नियम निकाय चुनावों पर भी लागू कर दिए हैं। अब कोई भी उम्मीदवार अगर शपथ-पत्र में पूरी सच्चाई नहीं लिखेगा तो उसका नामांकन रिटर्निंग अधिकारी सीधे रद्द कर देंगे।
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क्या-क्या बताना होगा?
- खुद, पत्नी/पति और तीन आश्रित बच्चों की पूरी आय, आय का स्रोत और दिए गए टैक्स की डिटेल
- चल-अचल संपत्ति (अकेले की + संयुक्त स्वामित्व वाली दोनों)
- शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, कंपनियों में निवेश
- कितना कर्ज़ लिया है, कितना दिया है
- बिजली, पानी, टैक्स आदि में कितना सरकारी बकाया है
- दो साल या उससे ज्यादा सजा वाले सारे आपराधिक मुकदमे – FIR नंबर, थाना, जिला, कोर्ट का स्टेटस सब लिखना होगा
- सोशल मीडिया अकाउंट, ई-मेल ID, मोबाइल नंबर
- घर में फ्लश शौचालय है या साधारण, यह भी लिखित में बताना होगा!
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चुनावी खर्च पर सख्त नजर
- लोकसभा-विधानसभा की तरह ही रोज़ का चुनावी खर्च का ब्यौरा देना होगा
- अलग से चुनाव खर्च रजिस्टर रखना अनिवार्य
- चुनाव खत्म होने के 30 दिन के अंदर पूरा हिसाब राज्य निर्वाचन आयोग को जमा करना होगा
- कोई भी व्यक्ति मात्र 10 रुपए की फीस देकर किसी भी उम्मीदवार का खर्च का पूरा ब्यौरा ले सकेगा
- खर्च की अधिकतम सीमा नगरीय विकास विभाग तय करेगा, उससे एक रुपया भी ज्यादा खर्च किया तो कार्रवाई
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह ने साफ कहा है कि निकाय चुनावों में भी अब धन-बल और अपराधियों का प्रभाव नहीं चलेगा। जो नियम सांसद-विधायक बनने वालों पर लागू हैं, वही नियम अब वार्ड के पार्षद तक पर लागू होंगे।
90% से ज्यादा नगर निकायों में चुनाव 2027 में ही होंगे। उससे पहले होने वाले किसी भी पार्षद उप-चुनाव में भी यही नए नियम लागू रहेंगे।
चुनावी विशेषज्ञों का कहना है कि ये नियम आने के बाद कई मौजूदा पार्षद और दिग्गज नेता भी 2027 में टिकट पाने से पहले सोचेंगे, क्योंकि अब कुछ भी छुपाना नामुमकिन हो जाएगा।