Harda News : मध्य प्रदेश। हरदा जिले के किसानों को भावांतर भुगतान योजना से बड़ा झटका लगा है। मंडी में सोयाबीन बेचने के बावजूद 436 किसानों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। शासन ने 3500 रुपये प्रति क्विंटल से कम भाव पर बिकी सोयाबीन को “नॉन-एफएक्यू” (Non-FAQ) श्रेणी में रख दिया है, जिससे ये किसान योजना से बाहर हो गए।
हरदा की मुख्य कृषि उपज मंडी में 24 अक्टूबर से अब तक कुल 2004 किसानों ने सोयाबीन बेची और भावांतर योजना के लिए आवेदन किया था। मंडी प्रशासन ने सभी के नाम शासन को भेजे। शासन की सत्यापन सूची में सिर्फ 1568 किसानों के नाम ही शामिल किए गए। बाकी 436 किसानों को बाहर कर दिया गया।
मंडी सचिव हरनारायण भिलाला ने बताया, “शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 3500 रुपये प्रति क्विंटल से कम भाव पर बिकी सोयाबीन नॉन-एफएक्यू मानी जाएगी और उसे भावांतर का लाभ नहीं मिलेगा। हम सिर्फ शासन के आदेश का पालन कर रहे हैं।”
टिमरनी तहसील के रायबोर गांव के किसान सुमित दीक्षित भी इन्हीं 436 किसानों में शामिल हैं। सुमित ने 23 क्विंटल सोयाबीन 3261 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेची थी। उन्होंने कहा, “इस साल बारिश ने फसल खराब कर दी, उत्पादन आधा रह गया।
ऊपर से मंडी में भाव भी कम मिला। हमें लगा था कि कम से कम भावांतर योजना से कुछ राहत मिल जाएगी, लेकिन अब वह भी नहीं मिल रही। सरकार से मांग है कि 3000 से 3500 रुपये के बीच बिकने वाली सोयाबीन को भी योजना में शामिल किया जाए।”
इसी तरह कई किसानों की सोयाबीन 3200 से 3490 रुपये के बीच बिकी, लेकिन सबको एक ही जवाब मिला – नॉन-एफएक्यू होने की वजह से लाभ नहीं। किसान परेशान हैं कि जब मंडी में उनकी फसल का यही भाव मिला तो गलती उनकी कहां हुई?
किसानों का कहना है कि इस साल सोयाबीन की क्वालिटी बारिश की वजह से प्रभावित हुई थी, जिससे एफएक्यू मानक पूरा नहीं हो पाया। फिर भी सरकार को चाहिए था कि किसानों की मजबूरी को समझते हुए सभी को लाभ देती। अब ये 436 किसान न तो अच्छा भाव पा सके और न ही भावांतर योजना का लाभ।