Betul News : बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पुलिस ने राज्य स्तर की सबसे बड़ी साइबर ठगियों में से एक का पर्दाफाश किया है। एक ही बैंक की सात शाखाओं के खातों से करीब 9 करोड़ 84 लाख रुपये का हेरफेर किया गया था। हैरानी की बात यह है कि इनमें एक मृत व्यक्ति के खाते से भी लगातार लेन-देन होते रहे।
साइबर सेल की हाईटेक जांच के बाद पुलिस ने इंदौर में छापा मारकर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारियों के साथ ही 15 मोबाइल फोन, 25 सिम कार्ड, 21 एटीएम कार्ड, 11 पासबुक, 2 लैपटॉप, 2 पीओएस मशीनें और 28 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए।
यह मामला तब सामने आया जब खेड़ी सावलीगढ़ के रहने वाले गरीब मजदूर बिसराम इवने ने कलेक्टर और एसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज की। उन्होंने बताया कि उनके जनधन खाते में अचानक करीब दो करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन दिख रहे हैं।
एक मजदूर के खाते में इतनी बड़ी रकम देखकर पुलिस हरकत में आ गई। एसपी वीरेंद्र जैन के सख्त निर्देश पर साइबर सेल ने तुरंत तकनीकी जांच शुरू की।
जांच के दौरान पता चला कि ठगों ने बैतूल के आसपास के सात खातों का इस्तेमाल किया था। इनमें बिसराम इवने, उनकी पत्नी नर्मदा इवने, मुकेश उइके, नीतेश उइके, अमोल, चंदन और राजेश बार्डे के नाम शामिल थे। सबसे चौंकाने वाली बात राजेश बार्डे के खाते की निकली।
राजेश की मौत हो चुकी थी, लेकिन उसके खाते में ट्रांजेक्शन जारी थे। मोबाइल नंबर बदल दिया गया था, नया एटीएम कार्ड जारी हुआ था और इंटरनेट बैंकिंग भी चालू थी। ठगों ने मृतक के दस्तावेजों का फर्जी इस्तेमाल कर खाते को एक्टिव रखा।
साइबर सेल की गहन जांच में गिरोह का पूरा modus operandi सामने आया। ठग लोग ऑनलाइन निवेश, लॉटरी जीतने या नौकरी के झांसे देकर लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाते थे। फिर उन खातों से पैसे निकालकर बैतूल में खोले गए इन फर्जी या चोरी के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। पैसे जमा होते ही तुरंत निकाल लिए जाते थे, ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो। यह चेन हर रोज लाखों रुपये का हेरफेर कर रही थी।
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पुलिस को सबसे बड़ा सुराग बैंक के अस्थायी कर्मचारी से मिला। पासबुक एंट्री करने वाले राजा उर्फ आयुष चौहान (28 वर्ष, खेड़ी सावलीगढ़) ने गिरोह के लिए बैंक की गोपनीय जानकारी लीक की। केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल लिंकिंग डिटेल्स और ग्राहक डेटा इसी रास्ते ठगों तक पहुंचा।
गिरोह डेटा के आधार पर पूरी ‘किट’ तैयार करता था – सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक। यह किट बस से इंदौर भेजी जाती, जहां से हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन होते थे। गिरोह इसे ‘किट ट्रांसफर नेटवर्क’ कहता था।
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तकनीकी सबूतों के आधार पर बैतूल पुलिस ने इंदौर के दो ठिकानों पर दबिश दी। वहां से अंकित राजपूत (32 वर्ष) और नरेंद्र सिंह राजपूत (24 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। तीनों आरोपी पूछताछ में टूट चुके हैं।
एसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि फॉरेंसिक जांच जारी है और बाहरी नेटवर्क को ट्रेस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में साइबर मॉनिटरिंग को और मजबूत किया जाएगा। जनता से अपील की कि संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें।