MP News : इंदौर। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के इंदौर पुलिस पर गंभीर सवाल उठाते हुए दो वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है। अदालत में गलत और भ्रामक शपथ-पत्र पेश करने के आरोप में एडिशनल डीसीपी दिशेष अग्रवाल और चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को व्यक्तिगत रूप से 25 नवंबर को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है।
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ये है पूरा मामला
दरअसल, यह पूरा मामला राशन कालाबाजारी के एक आरोपी की जमानत याचिका से जुड़ा है। आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा था कि पुलिस ने उसके खिलाफ जानबूझकर झूठी जानकारी दी है ताकि उसकी जमानत रुक जाए।
पुलिस की ओर से पेश किए गए पहले हलफनामे में दावा किया गया था कि आरोपी के खिलाफ कुल आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं। लेकिन जब अदालत ने गहराई से जांच की तो पता चला कि इनमें से चार मामले तो आरोपी से जुड़े ही नहीं हैं। उन चार मामलों में एक रेप का केस भी शामिल था, जिसमें आरोपी का नाम तक नहीं था।
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अदालत को गुमराह करने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इसे बेहद गंभीर अपराध माना। अदालत ने कहा कि पुलिस का यह कृत्य न्यायिक प्रक्रिया के साथ खुली छेड़छाड़ है। गलत सूचना देकर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई है।
पुलिस अधिकारियों ने सफाई में कहा कि हलफनामा कंप्यूटर पर तैयार किया गया था और पिता-पुत्र के नाम एक जैसे होने की वजह से गलती हो गई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बहाने को सिरे से खारिज कर दिया।
अदालत ने नाराजगी जताते हुए थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को शो-कॉज नोटिस भी जारी किया है। साथ ही हलफनामा तैयार करने में शामिल सभी लोगों को 25 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने को कहा गया है। सभी को 23 नवंबर तक अपना लिखित स्पष्टीकरण भी जमा करना होगा। कोर्ट ने साफ कहा कि इस तरह की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शहडोल कलेक्टर पर हाईकोर्ट ने लगाया दो लाख का जुर्माना
यह मामला एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पहले भी कई बार पुलिस पर जमानत रोकने के लिए फर्जी क्राइम रिकॉर्ड दिखाने के आरोप लग चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसे मामले दोबारा सामने आए तो सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
मध्य प्रदेश पुलिस के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि हाल ही में शहडोल कलेक्टर पर भी इसी तरह की गलती के लिए हाईकोर्ट ने दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
Q. सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के किन पुलिस अधिकारियों को तलब किया है?
एडिशनल डीसीपी दिशेष अग्रवाल और चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को 25 नवंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने को कहा गया है।
Q. पुलिस पर झूठा हलफनामा देने का क्या आरोप है?
पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए आरोपी के खिलाफ ८ मामले बताए थे, जिनमें से ४ पूरी तरह फर्जी थे। इनमें एक रेप का केस भी शामिल था जिसमें आरोपी का नाम तक नहीं था।
Q. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या टिप्पणी की?
अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के साथ छेड़छाड़ और अदालत को गुमराह करने का गंभीर अपराध बताया है। पुलिस के तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
Q. दोनों अफसरों को कब तक अपना स्पष्टीकरण जमा करना है?
23 नवंबर 2025 तक लिखित स्पष्टीकरण जमा करना होगा और 25 नवंबर को व्यक्तिगत पेशी देनी है।
Q. क्या इस मामले में किसी को शो-कॉज नोटिस जारी हुआ?
हाँ, थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। हलफनामा तैयार करने वाले सभी लोगों को भी तलब किया गया है।