MP News : शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में किसानों की फसलों को नीलगाय और काले हिरणों से बचाने के लिए एक अनोखा अभियान चल रहा है। दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम वन विभाग के साथ मिलकर बोमा तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इस तरीके में हेलीकॉप्टर की मदद से जानवरों को घेरकर सुरक्षित पकड़ा जाता है।
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अभियान शुजालपुर और कालापीपल इलाकों में जोरों पर है। पकड़े गए काले हिरण यानी कृष्णमृग और नीलगाय को राष्ट्रीय उद्यानों व अभयारण्यों में छोड़ा जा रहा है। बुधवार को टीम ने एक बड़ा कारनामा किया। पोलायकला तहसील के लसूडिया घाघ और निपनिया खुर्द गांवों में बोमा लगाया गया।
उमरीसिंघी, खड़ी, पोलायकला, मोरटा केवड़ी, तलेनी, जरखी और सकरई जैसे गांवों के खेतों से 153 कृष्णमृग पकड़े गए। इन्हें तुरंत जंगलों में रिहा कर दिया गया। अब तक जिले में कुल 448 काले हिरण रेस्क्यू हो चुके हैं।
वनमंडल अधिकारी वीरेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि यह अभियान फसल नुकसान को कम करेगा। किसान लंबे समय से परेशान थे। अब राहत मिलेगी। संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर ऋजु बाफना ने हेलीकॉप्टर से अभियान का जायजा लिया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशंस टीम से पूरी जानकारी ली।
पकड़े जानवरों को देश के अन्य अभयारण्यों तक कैसे पहुंचाया जाता है, यह भी समझा। अभियान में प्रधान मुख्य वन संरक्षक वीएन अंबाड़े, सेवानिवृत्त एचएस पाबला, एल कृष्णमूर्ति और अजय यादव जैसे बड़े अधिकारी मौजूद रहे। वे बोमा क्षेत्र में निगरानी कर रहे थे।
यह अभियान 5 नवंबर तक चलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा जानवरों को सुरक्षित जगह पहुंचाया जाए। इससे वन्यजीव संरक्षण भी मजबूत होगा और किसानों को फायदा मिलेगा। जिले में हजारों काले हिरण और नीलगाय हैं। बोमा तकनीक से बिना नुकसान पहुंचाए रेस्क्यू हो रहा है।
किसान खुश हैं। वे कहते हैं कि अब फसलें सुरक्षित रहेंगी। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि अभियान में सहयोग करें। जानवरों के झुंड की सूचना तुरंत दें। यह पहला मौका है जब भारत में इतने बड़े स्तर पर हेलीकॉप्टर वाली बोमा विधि अपनाई गई है। सफलता मिलने पर इसे पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।