Ayurvedic Medicines for Cough : भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में Coldrif कफ सिरप से 16 बच्चों की मौत ने दवा सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। सामान्य खांसी के लिए एलोपैथिक सिरप की जगह आयुर्वेदिक उपचार सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं। सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑफ आयुर्वेद, भोपाल के प्राचार्य और आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने खांसी के लिए आयुर्वेदिक उपाय अपनाने की सलाह दी है। तुलसी, शहद, अदरक, और मुलेठी जैसे घरेलू नुस्खे प्रभावी हैं।
खांसी के लिए अपनाए आयुर्वेदिक उपाय
सर्वपल्ली राधाकृष्णन कॉलेज ऑफ आयुर्वेद हॉस्पिटल एन्ड रिसर्च सेंटर भोपाल के प्राचार्य व आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ राकेश पाण्डेय ने कहा कि 1 से 5 वर्ष के बच्चों को तुलसी स्वरस में शहद मिलाकर दिन में तीन बार दें।
6 से 10 वर्ष के बच्चों को तुलसी रस, अदरक रस व शहद मिलाकर दिन में 4 बार दें। 11 से 15 वर्ष के बच्चों को तुलसी रस, सोंठ, अदरक, काली मिर्च व शहद मिलाकर दिन में तीन बार दें। 16 वर्ष से लेकर वयस्कों में तुलसी रस, सोंठ, अदरक, काली मिर्च, पिप्पली व शहद मिलाकर सेवन करायें।
डॉ पाण्डेय बताते हैं कि तुलसी में इन्फ्लेमेटरी, एंटीटसिव, एंटीएलर्जिक गुण होते हैं । यष्टिमधु जिसे मुलेठी कहते हैं वो गले की खराश मिटाती है। वयस्क हल्दी वाला दूध या त्रिकटु चूर्ण को भी शहद के साथ ले सकते हैं। आयुर्वेद शास्त्रों में सितोपलादि व तालिशादि चूर्ण को शहद के साथ सेवन से खांसी में त्वरित लाभ बताया गया है।
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अगर काढ़ा पिलाना चाहें तो एक -डेढ़ कप पानी 6 तुलसी के पत्ते, दो इंच किसा अदरक, 5 काली मिर्च पिसी हुई, दालचीनी पावडर व लौंग की 5 कली डालकर 10 मिनिट तक उबालें फिर ठण्डा करके छानकर उसमें एक से दो चम्मच शहद मिलाकर काढ़े के रूप में सुबह-शाम सेवन करें।
यह जरूर ध्यान रखें कि बिना डॉक्टरी सलाह के स्वयं दवाई न करें। एक से सात वर्ष के बच्चों को काढ़े से दूर रखें। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी , दस्त या गंभीर लक्षण हों तो डॉक्टर को दिखायें। ठण्डी वस्तुओं से परहेज करें।
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ज्यादा मसाले वाली चीजें व खटाई से दूरी बना लें तथा फ्रिज में रखें ठण्डे पदार्थों को तुरंत या बाद में भी खांसी आ रही हो तो मत खायें। डॉ पाण्डे बताते हैं कि वयस्कों में गुनगुना पानी पीते रहें, नमक के गरारे व गुनगुना भाप लेना हितकर है। पांच वर्ष से छोटे बच्चों में सतर्कता बरतें। ये आयुर्वेदिक दवायें हर घर में सामान्य तौर पर उपलब्ध रहती हैं। डॉक्टरी सलाह पर ही दवायें लेना लाभकारी होगा।
