राहुल और अखिलेश को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस भेजा गया, CJI ने कहा कि हमें डरा नहीं सकते
नेताओं को नोटिस: चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं को औपचारिक नोटिस जारी किया है।


12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए विरोध मार्च को लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत ने काफ़ी कड़ा रुख दिखाया है, और ऐसा कुछ सुनने को मिला कि लोग थोड़ा सन्न रह गए। 15 अक्टूबर 2026 को इसी मुद्दे की सुनवाई करते हुए अदालत ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कुछ दूसरे नेताओं को नोटिस थमा दिया था। दिगंत मिश्रा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये भी कहा कि न्यायपालिका को किसी भी तरह डराया या दबाव में नहीं लाया जा सकता, बस ये लाइन काफी सख्त थी।
INDIA गठबंधन के नेताओं का विरोध
ये मामला मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी, और फिर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसी प्रक्रिया के इर्द गिर्द घूमता बताया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि वोट चोरी किए जा रहे हैं, जिससे लोगों के मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ रहा है, और नतीजा ये कि गुस्सा बाहर आया। इसी नाराज़गी में राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने मार्च निकाला था, जिनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और तेजस्वी यादव का नाम भी आता है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग रखी थी, और ये बात भी चर्चा में रही कि उनका रवैया क्या था ।
CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के आचरण पर सवाल उठाए, और उन्होंने कहा कि अदालत ऐसी जगह नहीं है जहां बस हाथी दांत के अंदर बैठकर काम हो। उन्होंने ये भी जाहिर किया कि अदालत को बाहर होने वाली हर गतिविधि की जानकारी होती रहती है। हालांकि कोर्ट ने साथ साथ ये भी स्पष्ट कर दिया कि केवल नोटिस जारी होना, किसी को दोषी मान लेने जैसा नहीं है। आगे की कानूनी कार्रवाई नेताओं के जवाबों पर निर्भर करेगी, और फिर आगे का रास्ता साफ होगा।
मुलाकात के बजाय कानूनी रास्ते की सलाह
मार्च निकालने से पहले राहुल गांधी, और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CJI से मिलने का समय मांगा था, ताकि अपनी बात रख सकें। लेकिन CJI ने मुलाकात जैसी बात छोड़कर उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करने की सलाह दी थी। फिर भी, नेताओं ने सड़क पर उतरने का निर्णय ले लिया, और वही आगे चलकर मामला अदालत तक पहुंच गया।
सुरक्षा एजेंसियों को CCTV फुटेज सहेजने के निर्देश
अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उस दिन से जुड़े सारे CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच, ठीक ढंग से हो सके।