सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द, 2873 अपराधियों पर जारी रहेगा एक्शन
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़ी सभी एफआईआर रद्द कर दी हैं। वहीं नीट 2026 के पीड़ित छात्रों के लिए मुआवजे की नीति 3 महीने में बनेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन से जुड़ी सभी एफआईआर को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने इस बड़े फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेषाधिकार शक्तियों का सीधा इस्तेमाल किया है। हालांकि, सरकार की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटाबेस के अनुसार, दिल्ली में आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ कानूनी मुकदमा पहले की तरह ही जारी रहेगा।
13 एफआईआर रद्द करने की उठी मांग
नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज 13 एफआईआर को रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में विस्तार से सुनवाई हुई। अदालत में यह अहम मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से रखी गई थी। इस दौरान पुलिस ने अदालत से उन 2,873 लोगों की भूमिका की गहराई से जांच करने के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की परमिशन भी मांगी है, जो इस प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद थे।
आपराधिक रिकॉर्ड वालों को नहीं मिलेगी कोई राहत
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए इस भारी विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ चुनिंदा लोगों के खिलाफ एफआईआर पर आगे बढ़ने की साफ अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर आगे बढ़ाने की परमिशन मिली है, उनका पहले से ही गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस ने भी कोर्ट में यह बात साफ कर दी है कि आम तौर पर किसी के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से यह विशेष आग्रह भी किया है कि उसका यह फैसला सिर्फ इसी मामले की मौजूदा परिस्थितियों तक ही सीमित रहना चाहिए और भविष्य के अन्य मामलों में इसे एक मिसाल (Precedent) के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में क्या बताया?
इस मामले पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को जानकारी दी कि केंद्र सरकार (दिल्ली पुलिस) के साथ-साथ बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की सरकारों ने भी छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपने-अपने आवेदन दाखिल कर दिए हैं।
इसके अलावा, इन सभी राज्य सरकारों ने अदालत को यह पक्का आश्वासन भी दिया है कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए इन प्रदर्शनों से संबंधित किसी भी घटना को लेकर भविष्य में कोई भी नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
CJP ने रद्द किया अपना प्रस्तावित मार्च
आज की सुनवाई शुरू होने से ठीक पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने आगामी 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने का बड़ा फैसला ले लिया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव ने मीडिया को बताया कि केंद्र सरकार ने उनकी सभी मांगों को पूरा करने का पक्का आश्वासन दे दिया है।
इसी दौरान, दास ने मामले को सुलझाने में दोनों पक्षों के वकीलों और अदालत की ओर से किए गए शानदार प्रयासों के लिए सभी का दिल से धन्यवाद भी दिया।
नीट के पीड़ित परिवारों को मिलेगा मुआवजा
सीजेआई (CJI) ने एक बेहद अहम निर्देश देते हुए कहा कि जहां तक नीट परीक्षा, 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजे का सवाल है, हमें बताया गया है कि इसके बारे में एक पक्की नीति अगले 3 महीने के भीतर बना ली जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस नीति को 3 महीने में पूरा करके पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।
हर मसले का हल है बातचीत: सीजेआई
सीजेपी के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष पूरी सद्भावना के साथ काम करें, तो बड़े से बड़े मुद्दों को एक-एक करके आसानी से सुलझाया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं बनी है, जिसे खुले मन से चर्चा के जरिए हल न किया जा सके। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने भी सहमति जताते हुए कहा कि दोनों ही पक्षों ने बेहद रचनात्मक तरीके से काम किया है और एक-दूसरे को कभी प्रतिद्वंद्वी की नजर से नहीं देखा।
20 जुलाई को हुआ था भारी बवाल
आपको बता दें कि 20 जुलाई को सीजेपी के नेतृत्व में दिल्ली में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच भारी झड़प हो गई थी। जब भीड़ संसद की ओर आक्रामक तरीके से बढ़ रही थी, तो उसे रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोलों का भी इस्तेमाल किया गया था।
इस घटना के तुरंत बाद छात्रों का यह आंदोलन आग की तरह देश के कई शहरों तक फैल गया। इस पूरे आंदोलन में छात्रों की सबसे मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा थी।
यह पूरा आंदोलन 20 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। आखिरकार, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से सीजेपी की बाकी सभी मांगें मान लिए जाने के बाद 25 जुलाई को यह आंदोलन पूरी तरह खत्म कर दिया गया था।