RBI Monetary Policy Meeting: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, EMI और होम लोन पर क्या होगा असर?
RBI की तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा गया। जानिए होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, FD और EMI पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यू ही स्थिर रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त को ये बात सार्वजनिक की। इस निर्णय का असर रेपो रेट से लिंक होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वालों पर सीधे पड़ेगा। यानी फिलहाल EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। RBI ने ये कदम महंगाई के दबाव, वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, और घरेलू बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर लिया है
तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में क्या बड़ा फैसला रहा?
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 अगस्त से शुरू हुई थी। लगभग तीन दिन तक चर्चा चली फिर केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही रोकने का निर्णय लिया। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ग्लोबल बाजार में चल रही अनिश्चितता, और महंगाई से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए ब्याज दरों में अभी फेर बदल न करना एक संतुलित कदम है। केंद्रीय बैंक का फोकस महंगाई की पकड़ बनाए रखना भी है, और आर्थिक प्रगति को सहारा देना भी
2025 में कई बार बदली गई थीं दरें
RBI ने साल 2025 के दौरान ब्याज दरों में कई बड़े फैसले किए थे। फरवरी में रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटा कर 6.25 प्रतिशत किया गया। फिर अप्रैल में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती देखी गई। जून में केंद्रीय बैंक ने 0.50 प्रतिशत की अपेक्षाकृत बड़ी राहत दी, जबकि दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की अतिरिक्त कटौती के बाद रेपो रेट 5.25 प्रतिशत के स्तर तक आ गया। अब लगातार तीसरी मौद्रिक नीति बैठक में भी इसे इसी दायरे में बनाए रखा गया है
EMI नए लोन और FD पर क्या असर पड़ेगा ?
रेपो रेट के स्थिर रहने से फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में कोई फर्क नहीं दिखेगा। नए लोन की बात करें तो, ये संभावना है कि उधार मौजूदा ब्याज दरों के आधार पर ही मिलेंगे। वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में भी तत्काल कोई बहुत बड़ा बदलाव होता नज़र नहीं आ रहा है। लेकिन कई बैंक अपनी फंडिंग cost, और बाजार की वर्तमान हालात के मुताबिक, आगे चलकर सीमित बदलाव कर सकते हैं
आगे की पॉलिसी पर बाजार की नजर रहेगी
RBI की तरफ से संकेत ये मिले हैं कि आने वाले फैसले महंगाई और आर्थिक हालात की समीक्षा के आधार पर लिए जाएंगे। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई फिर से ज्यादा जोर पकड़ती है, तो आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों को लेकर दोबारा विचार हो सकता है। फिलहाल रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने से लोन लेने वालों को राहत मिली है और फाइनेंशियल मार्केट में स्थिरता का संदेश भी गया है