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2029 Gen Z Voters : 2029 के चुनाव में 38 करोड़ Gen-Z वोटर, युवाओं को साधने में जुटे राजनीतिक दल

2029 Gen Z Voters: 2029 के लोकसभा चुनाव में करीब 38 करोड़ Gen-Z वोटर चुनावी तस्वीर बदल सकते हैं। युवाओं को साधने के लिए BJP, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल सोशल मीडिया और युवा संवाद पर जोर दे रहे हैं।

By Archana Yadav
1 Aug 2026
2029 Gen Z Voters : 2029 के चुनाव में 38 करोड़ Gen-Z वोटर, युवाओं को साधने में जुटे राजनीतिक दल
2029 Gen Z Voters

2029 Gen Z Voters: नई दिल्ली। 2029 के लोकसभा चुनाव में युवाओं की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बड़ी होने वाली है। अनुमान के मुताबिक 18 से 32 साल की उम्र के करीब 38 करोड़ Gen-Z वोटर चुनाव में वोट डालने की उम्र में होंगे। यानी हर चार वोट में करीब एक वोट इस पीढ़ी का हो सकता है। यही आंकड़ा अब राजनीतिक दलों की चिंता और तैयारी, दोनों बढ़ा रहा है। BJP से लेकर कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों तक, सभी युवाओं तक पहुंचने के लिए अपनी चुनावी रणनीति बदलने में जुटे हैं।

अब चुनावी प्रचार सिर्फ बड़ी रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रह गया है। सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो, पॉडकास्ट, मीम्स और इन्फ्लुएंसर के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश बढ़ रही है। साथ ही अलग-अलग पार्टियां युवा संवाद और छात्र संगठनों के जरिए सीधे युवाओं से जुड़ने की तैयारी कर रही हैं।

रोजगार से लेकर AI तक, युवाओं के मुद्दे अलग

Gen-Z के लिए चुनाव में सिर्फ पारंपरिक राजनीतिक मुद्दे ही मायने नहीं रखेंगे। रोजगार, शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल दुनिया में करियर के मौके जैसे सवाल भी अहम हो सकते हैं।

इस पीढ़ी के सामने नौकरी और पढ़ाई से जुड़े सवाल सीधे उसके भविष्य से जुड़े हैं। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ वादे करना काफी नहीं होगा। युवाओं को यह भी बताना होगा कि उन वादों पर काम कैसे होगा और उसका फायदा उन्हें कब मिलेगा।

2029 में देश की आबादी में Gen-Z की बड़ी हिस्सेदारी

यूएन वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2024 के 2029 के अनुमान के मुताबिक भारत की आबादी करीब 151.3 करोड़ हो सकती है। इसमें 18 से 32 साल की उम्र वाले Gen-Z की संख्या करीब 38 करोड़ यानी 25.1% रहने का अनुमान है।

यानी 2029 के चुनाव में हर चार में से करीब एक वोटर इसी पीढ़ी से हो सकता है। हालांकि, कुल आबादी के आंकड़े में 0 से 17 साल की उम्र वाले Gen Alpha और Gen Beta भी शामिल हैं। इसलिए चुनाव के लिहाज से सबसे अहम आंकड़ा 38 करोड़ Gen-Z का ही है।

आंकड़ों के मुताबिक 0 से 17 साल की उम्र वाले Gen Alpha और Gen Beta की आबादी करीब 41.7 करोड़ यानी 27.6% हो सकती है। वहीं 33 से 48 साल की उम्र वाले Millennials करीब 35.7 करोड़, 49 से 64 साल के Gen-X करीब 23.4 करोड़ और 65 से 83 साल के Baby Boomers करीब 11.7 करोड़ हो सकते हैं।

BJP की नजर फर्स्ट-टाइम वोटर्स पर

युवाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए BJP फर्स्ट-टाइम वोटर्स तक पहुंच बनाने पर जोर दे रही है। इसके लिए पार्टी सोशल मीडिया पर मीम्स, इन्फोग्राफिक्स और छोटे वीडियो जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रही है।

भारतीय जनता युवा मोर्चा के जरिए विश्वविद्यालयों और युवा समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। मकसद युवाओं को पार्टी और सरकार की नीतियों से जोड़ना है।

कांग्रेस के लिए रोजगार और पेपर लीक बड़े मुद्दे

कांग्रेस की रणनीति में रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दे प्रमुख हैं। पार्टी युवा संवाद और छात्र संगठनों के जरिए युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

यानी जहां BJP सरकार के काम और योजनाओं को युवाओं तक पहुंचाने पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाकर उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

सपा और TMC का भी डिजिटल पर जोर

समाजवादी पार्टी अपनी सोशल मीडिया टीम में युवा चेहरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका बढ़ा रही है। पार्टी रील्स, शॉर्ट वीडियो और क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेंट के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

वहीं तृणमूल कांग्रेस डिजिटल इन्फ्लुएंसर, गेमिंग कम्युनिटी और WhatsApp-Instagram नेटवर्क के जरिए युवाओं से जुड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे साफ है कि आने वाले चुनाव में डिजिटल प्लेटफॉर्म राजनीतिक दलों के लिए और ज्यादा अहम होने वाले हैं।

युवाओं को साधने के लिए दलों के सामने 5 बड़ी चुनौतियां

पहली चुनौती है भरोसा। Gen-Z किसी पार्टी के दावे को सिर्फ इसलिए स्वीकार करे, यह जरूरी नहीं है। वह काम और दावों की सच्चाई जानने के लिए अलग-अलग जानकारी देख सकती है। ऐसे में राजनीतिक दलों को अपने दावों के साथ ठोस काम भी दिखाना होगा।

दूसरी चुनौती भाषा की है। लंबे भाषण और मुश्किल राजनीतिक शब्द युवाओं से जुड़ने में उतने असरदार नहीं हो सकते। उन्हें कम समय में सीधी और साफ बात चाहिए।

तीसरी चुनौती डिजिटल प्लेटफॉर्म की है। युवा सोशल मीडिया, शॉर्ट वीडियो और पॉडकास्ट पर काफी समय बिताते हैं। इसलिए पार्टियों को सिर्फ पोस्ट डालने के बजाय यह समझना होगा कि वहां युवाओं से किस तरह बात की जाए।

चौथी चुनौती भागीदारी की है। युवा सिर्फ चुनाव के समय वोट देने तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाए और फैसले लेने की प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका हो।

पांचवीं चुनौती पुराने राजनीतिक मुद्दों से जुड़ाव की है। Gen-Z के लिए रोजगार, शिक्षा, टेक्नोलॉजी और भविष्य के अवसर जैसे मुद्दे ज्यादा सीधे मायने रखते हैं। इसलिए राजनीतिक दलों को अपनी प्राथमिकताओं में इन मुद्दों को जगह देनी होगी।

2029 में युवा वोटर बदल सकता है चुनाव का तरीका

2029 के चुनाव में करीब 38 करोड़ Gen-Z वोटर किसी भी पार्टी के लिए नजरअंदाज करने वाली संख्या नहीं होंगे। यही वजह है कि राजनीतिक दल अभी से युवाओं तक पहुंच बनाने के तरीके बदल रहे हैं।

आने वाले समय में चुनावी प्रचार का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई दे सकता है। रैलियों के साथ रील्स, भाषणों के साथ पॉडकास्ट और बड़े पोस्टरों के साथ छोटे-छोटे डिजिटल कैंपेन भी चुनाव का हिस्सा होंगे।

हालांकि, सिर्फ सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना ही काफी नहीं होगा। युवाओं के लिए असली सवाल यह रहेगा कि रोजगार, शिक्षा, परीक्षा, टेक्नोलॉजी और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर कौन सी पार्टी क्या कर रही है। यही वजह है कि 2029 का चुनाव सिर्फ वोटों की गिनती का मुकाबला नहीं होगा, बल्कि युवाओं के भरोसे की भी बड़ी परीक्षा होगा।

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