JPSC Protest Update: सरकार से बातचीत को तैयार छात्र, लेकिन रखीं दो बड़ी शर्तें; भर्ती विवाद पर आंदोलन जारी
JPSC छात्रों ने सरकार के सामने रखीं दो शर्तें
रांची। झारखंड में JPSC समेत कई और भर्ती परीक्षाओं को लेकर कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन सच में लगातार उफान पर है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे छात्र जहां एक तरफ सरकार से बातचीत के लिए “हाँ” कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वो दो शर्तें भी रख दे रहे हैं… बस, और इधर उधर नहीं। उनका कहना है कि बातचीत सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ हो और वार्ता के दौरान कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधि साथ में मौजूद रहें , ताकि पूरा मामला पारदर्शी रहे। छात्रों के मुताबिक साफ सुथरी, खुली बातचीत से ही भर्ती विवाद को लेकर जो आशंका फैली है उसका कुछ न कुछ समाधान निकल सकता है।
सरकार के प्रस्ताव पर छात्रों ने क्या कहा?
छात्र नेता रविंद्र पासवान के अनुसार बुधवार को एसडीओ आंदोलन स्थल तक सरकार का प्रस्ताव लेकर आए और छात्र प्रतिनिधिमंडल के नाम मांगे। इसके बाद फिर तारीख और समय तय करने की बात कही गई। लेकिन छात्रों को थोड़ी आशंका भी है कि सरकार केवल पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुलाकर आंदोलन को सीमित करना चाहती है। उनका तर्क ये है कि आंदोलन दरअसल पूरे राज्य के अभ्यर्थियों का है, इसलिए बातचीत भी ज्यादा व्यापक और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, बस।
13वें दिन भी जारी रहा धरना और आमरण अनशन
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र धरना 13वें दिन तक चलता रहा। यहां छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत छह छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग ये है कि 14वीं JPSC परीक्षा विवाद की जांच CBI और ED से कराई जाए। उनका कहना है कि केवल CID जांच से उन्हें तसल्ली नहीं होती। इसी बीच CID ने मामले में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लिहाजा अब तक कुल 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
कैसे शुरू हुआ JPSC परीक्षा विवाद?
2 जुलाई 2026 को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। 103 पदों के लिए कुल 2,204 अभ्यर्थियों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए हुआ। परिणाम आने के बाद विवाद इसलिए बढ़ गया, क्योंकि कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए और एक उम्मीदवार की कथित OMR शीट वायरल हो गई। साथ ही ये सवाल भी उछले कि परिणाम पर अधिकारियों के हस्ताक्षर क्यों नहीं हैं। इसी कशमकश के बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा रद्द कर दी।
छात्रों की मांगों पर टिकी है अगली वार्ता
छात्रों की सबसे बड़ी मांग ये है कि पूरे मामले की जांच CBI और ED से हो। साथ में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने की भी बात है। उनका ये भी कहना है कि TDPL से कराई गई तमाम परीक्षाएं रद्द की जाएं और कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए। और आगे की परीक्षाएं किसी भरोसेमंद एजेंसी जैसे TCS से कराई जाएं। साथ ही JPSC और JSSC के उन अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। अभी सरकार और छात्रों के बीच वार्ता की कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अंतिम सहमति छात्रों की शर्तों पर ही निर्भर करेगी, या यों कहें कि वहीं से पूरा रास्ता तय होगा।