अमेरिका में H-1B वीजा फीस 99 लाख रुपये करने की तैयारी, भारतीयों पर पड़ेगा बड़ा असर
अमेरिकी सरकार ने विदेशों से आने वाले नए कर्मचारियों के H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर (लगभग 99 लाख रुपये) करने का प्रस्ताव रखा है। इस फैसले से सीधे भारत से होने वाली नियुक्तियों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
अमेरिका में जाकर नौकरी करने की ख्वाहिश रखने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बहुत बड़ा झटका सामने आया है। वाशिंगटन स्थित अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने नए H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर की भारी-भरकम फीस तय करने का नया प्रस्ताव रखा है। यह रकम भारतीय मुद्रा के हिसाब से लगभग 99 लाख रुपये बैठती है। अगर इस नियम को आधिकारिक तौर पर हरी झंडी मिल जाती है, तो अमेरिका के बाहर बैठे विदेशी कुशल कर्मचारियों को नौकरी पर रखने वाली अमेरिकी कंपनियों का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
अमेरिकी कंपनियों को देनी होगी 98.86 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस
जारी किए गए नए प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई भी अमेरिकी कंपनी भारत या किसी अन्य देश से किसी कर्मचारी को H-1B वीजा स्पॉन्सर करके अमेरिका बुलाएगी, तो उसे 1,03,265 डॉलर यानी करीब 98.86 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस चुकानी होगी। इतनी मोटी रकम का सीधा झटका उन अमेरिकी टेक कंपनियों पर लगेगा, जो टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और दूसरे टेक्निकल क्षेत्रों के माहिर लोगों को दूसरे देशों से अपने यहां नौकरी पर रखती हैं।
70 फीसदी हिस्सेदारी वाले भारतीयों के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें
इस फैसले की सबसे ज्यादा मार भारतीय प्रोफेशनल्स पर ही पड़ने वाली है, क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों का दबदबा सबसे ज्यादा है। वित्त वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो जारी हुए कुल H-1B वीजा में से करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले भारतीय कर्मचारियों की थी, जबकि 12 फीसदी हिस्सेदारी के साथ चीन दूसरे नंबर पर रहा था। ऐसे में वीजा शुल्क में इतनी बेतहाशा बढ़ोतरी होने के बाद भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए सीधे अमेरिका से जॉब ऑफर हासिल करना बेहद कठिन हो जाएगा।
छात्रों और रिन्यूवल कराने वालों को मिलेगी फीस से राहत
हालांकि, राहत की बात यह है कि अमेरिकी सरकार की यह नई प्रस्तावित फीस हर किसी आवेदक पर लागू नहीं की जाएगी। जो विदेशी नागरिक पहले से स्टूडेंट वीजा (F-1) पर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं और बाद में H-1B में शिफ्ट होते हैं, उन्हें इस भारी शुल्क से छूट मिल सकती है। इसके साथ ही जो लोग पहले से अमेरिका में काम कर रहे हैं और केवल अपना H-1B वीजा रिन्यू करवा रहे हैं, उन पर भी यह नियम लागू नहीं होगा। इसका मुख्य असर सिर्फ उन्हीं लोगों पर होगा जिन्हें कंपनियां सीधे विदेश से हायर करेंगी।
30 दिनों में मांगी गई जनता की राय, पहले 2 से 5 हजार डॉलर थी फीस
इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने की कोशिश की थी, लेकिन तब एक अमेरिकी अदालत ने उस फैसले पर रोक लगा दी थी और वह मामला अब भी कानूनी विवाद में उलझा हुआ है। अब इस नए प्रस्ताव पर 30 दिनों के लिए आम जनता और उद्योग जगत से राय मांगी गई है, जिसके बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि पहले H-1B वीजा की सामान्य सरकारी फीस सिर्फ 2,000 से 5,000 डॉलर के बीच ही हुआ करती थी।
