पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन का निधन, मध्य प्रदेश भाजपा में शोक की लहर
मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता पारस चंद्र जैन का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे।
भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता,और पूर्व मंत्री पारस चंद्र जैन, का 76 साल की उम्र में देहांत हो गया। पिछले कुछ समय से वो अस्वस्थ थे,और इंदौर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था , जहां उपचार के दौरान उन्होंने आखिर में अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि उज्जैन भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी दिनेश जाटवा और उनके निजी सहायक शुभम माली ने की। खबर लगते ही भाजपा कार्यकर्ता ,समर्थक ,और राजनीतिक गलियारों में शोक की हलचल तेज हो गई।
इंदौर के अस्पताल में चल रहा था इलाज
पारस चंद्र जैन की सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी रहा ,और इसके बाद उनका निधन हुआ। निधन के उपरांत उनका पार्थिव शरीर उज्जैन लाया जाएगा। अंतिम यात्रा उनके निवास से निकलेगी,और चक्रतीर्थ श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सूचना मिलते ही बड़ी तादाद में कार्यकर्ता शुभचिंतक के परिजनों के पास पहुंचे और श्रद्धांजलि दी।
छात्र राजनीति से मंत्री पद तक का सफर
20 जून 1950 को उज्जैन में जन्मे पारस चंद्र जैन ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी। छात्र जीवन में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के जरिए सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। फिर वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ साथ स्काउट-गाइड जैसी सामाजिक गतिविधियों में भी जुड़े रहे। संगठन में मेहनत,और जनता के बीच लगातार काम करने की वजह से राजनीति में उनकी अलग छवि बनी।
कई अहम विभागों की संभाली जिम्मेदारी
वर्ष 1990 में पारस चंद्र जैन पहली बार उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद वे कई बार जनता का प्रतिनिधित्व करते रहे,और कुल तीन बार विधायक बने। भाजपा की सरकार में उन्होंने वन विभाग,खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति,उपभोक्ता संरक्षण,और स्कूल शिक्षा विभाग में राज्य मंत्री के तौर पर काम किया। 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि 2016 में ऊर्जा मंत्री की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई।
‘पहलवान’ के नाम से भी थे प्रसिद्ध
राजनीति के अलावा पारस चंद्र जैन का एक अलग रिश्ता खेल, और अनुशासन से भी था। व्यायाम,योग और कुश्ती में रुचि के चलते लोग उन्हें दुलार से “पहलवान” कहकर पुकारते थे। हालांकि उनका राजनीतिक जीवन व्यस्त रहा,पर फिटनेस और नियमित दिनचर्या को वे हमेशा तवज्जो देते रहे।
2023 में नहीं मिला था चुनाव लड़ने का मौका
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने उज्जैन उत्तर सीट के लिए पारस चंद्र जैन की जगह अनिल जैन कालूहेड़ा को उम्मीदवार बनाया। टिकट न मिलने के बाद भी उन्होंने पार्टी से संबंध नहीं तोड़ा,और संगठनात्मक कामों में लगातार सक्रिय रहे। वे कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक की तरह बने रहे,और पार्टी के लिए काम करते रहे।
राजनीतिक जीवन में विवाद भी आए
अपने लंबे राजनीतिक सफर के दौरान पारस चंद्र जैन का नाम एक भ्रष्टाचार के मामले से भी जोड़ा गया था। उन पर विधायक निधि से जुड़े कामों में पद के दुरुपयोग का आरोप लगा था। इस मामले में लोकायुक्त उज्जैन ने पूर्व मंत्री सहित अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। हालांकि यह मामला अदालत के समक्ष न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत चला। वहीं,उनके समर्थक उन्हें जनसेवा और संगठन के प्रति समर्पित नेता के रूप में हमेशा याद करते हैं।
प्रदेश की राजनीति में छोड़ गए अलग पहचान
छात्र राजनीति से कदम रखकर मंत्री पद तक पहुंचने वाले पारस चंद्र जैन ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। भाजपा संगठन,सामाजिक सरोकारों ,और जनता से उनके लंबे जुड़ाव को हमेशा याद किया जाएगा। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता ,सामाजिक संगठन,और बड़ी संख्या में समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया।