हाइलाइट्स
- MP टोल रोड पर जनता से ज्यादा टोल वसूला गया।
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को तीन महीने में सुनवाई करने को कहा।
- पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने जनहित याचिका दायर की।
- टोल रोड पर एक्सीडेंट के आंकड़े चिंताजनक।
MP Toll Charge Case : मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के भोपाल-देवास, लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव टोल रोड पर लागत से कई गुना अधिक टोल वसूली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर हाईकोर्ट को तीन महीने में सुनवाई पूरी कर फैसला देने के निर्देश दिए हैं।
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पूर्व विधायक पारस सकलेचा की जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि हाईकोर्ट मामले में जल्द सुनवाई करे। याचिकाकर्ता को 15 दिन के भीतर नया आवेदन दाखिल करने की भी अनुमति दी गई है।
टोल रोड और वसूली का विवरण
| टोल रोड | प्रोजेक्ट लागत | टोल वसूला | लागत से अधिक वसूली |
|---|---|---|---|
| भोपाल–देवास | ₹345 करोड़ | ₹2056 करोड़ | ₹1711 करोड़ अधिक |
| जावरा–नयागांव | ₹426 करोड़ | ₹2635 करोड़ | ₹2209 करोड़ अधिक |
| लेबड़–जावरा | ₹589 करोड़ | ₹2376 करोड़ | ₹1787 करोड़ अधिक |
टोल संचालक कंपनियों ने मेंटेनेंस और ब्याज राशि बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और जनता से लागत से कई गुना ज्यादा टोल वसूला।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
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अप्रैल 2022 में हाईकोर्ट ने लेबड़-जावरा और जावरा-नयागांव टोल रोड याचिकाओं को खारिज किया।
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दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए दोबारा सुनवाई करने के निर्देश दिए।
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एक्सीडेंट और सुरक्षा की चिंता
याचिका में यह भी कहा गया कि इन टोल सड़कों पर दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंताजनक हैं, बावजूद इसके टोल वसूली जारी रखी गई।