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Groundwater Crisis Bhopal : भोपाल में बिना अनुमति बोरिंग पर सख्ती, FIR और 2 साल तक की सजा का प्रावधान

Groundwater Crisis Bhopal

हाइलाइट्स

  • भोपाल जिला जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित

  • निजी ट्यूबवेल और बोरवेल खनन पर तत्काल प्रतिबंध

  • बिना अनुमति बोरिंग पर एफआईआर और 2 साल तक सजा

  • आदेश 30 जून तक प्रभावी, शासकीय योजनाओं पर रोक नहीं

Groundwater Crisis Bhopal : भोपाल।  जिले में गिरते भूजल स्तर और बढ़ती गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टरकौशलेंद्र विक्रमसिंह ने पूरे भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है।

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इसके साथ ही निजी ट्यूबवेल और बोरवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। आदेश का उल्लंघन करने पर एफआईआर दर्ज होगी और दो साल तक की सजा का प्रावधान भी है।

बिना अनुमति बोरिंग कराने पर सख्त कार्रवाई

कलेक्टर के आदेश के अनुसार अब जिले में बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति ट्यूबवेल या नलकूप की बोरिंग नहीं करा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से बोरिंग कराता है या बोरवेल मशीन जिले में प्रवेश करती है, तो संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारी मशीन को जब्त कर एफआईआर दर्ज कर सकेंगे।

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नियमों का उल्लंघन करने पर दो हजार रुपए तक का जुर्माना, दो साल की सजा या दोनों का प्रावधान किया गया है। साथ ही बोरवेल मशीनों के जिले से गुजरने पर भी रोक लगा दी गई है।

पिछले साल से पहले लागू हुआ आदेश

तेज गर्मी और तेजी से गिरते भूजल स्तर को देखते हुए इस बार यह आदेश पहले ही लागू कर दिया गया है। पिछले वर्ष यह आदेश 7 अप्रैल को जारी किया गया था, जबकि इस बार करीब 25 दिन पहले ही लागू कर दिया गया है। यह प्रतिबंध 30 जून तक प्रभावी रहेगा।

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शासकीय योजनाओं पर नहीं होगा असर

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल निजी नलकूपों पर लागू होगा। शासकीय योजनाओं के तहत किए जा रहे नलकूप खनन कार्यों पर यह रोक लागू नहीं होगी। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) द्वारा संचालित कार्यों के लिए अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

पेयजल संकट से बचाव के लिए फैसला

जिले में कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि यदि अभी से सख्ती नहीं की गई तो गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लगाया गया है।

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इस कानून के तहत जारी हुआ आदेश

कलेक्टर ने बताया कि यह कार्रवाई मध्यप्रदेश ड्रिंकिंग वॉटर कंजर्वेशन एक्ट 1986 और उसके 2002 संशोधन के तहत की गई है। अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत भोपाल जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित किया गया है, जबकि धारा 6(1) के तहत निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है।

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