हाइलाइट्स
- भोपाल में मप्र शिक्षक संघ के सम्मेलन में पहुंचे सीएम मोहन यादव।
- बोले- आदिकाल से भारत शिक्षकों की वजह से पहचाना जाता है।
- विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण और सांदीपनि ने कृष्ण को तैयार किया।
Bhopal Teachers Conference : मध्य प्रदेश। भोपाल में मध्य प्रदेश शिक्षक संघ ने बुधवार को प्रदेश स्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता शिक्षक सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि थे। शिक्षक संघ ने उनका भव्य सम्मान किया। कार्यक्रम सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में हुआ।
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शिक्षिका कोकिला सेन का सम्मान
सम्मेलन में सीएम मोहन यादव ने अपनी पुरानी शिक्षिका कोकिला सेन का खास सम्मान किया। जैसे ही कोकिला सेन मंच पर आईं, मुख्यमंत्री उनके पास पहुंचे। उन्होंने चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। यह देखकर सब भावुक हो गए। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
पांच शिक्षकों को सम्मान
कार्यक्रम में पांच ऐसे शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा में नवाचार किए। इनके छात्रों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री ने पहले प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन किया।
आदिकाल से भारत की पहचान शिक्षकों के कारण
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिकाल से भारत की पहचान शिक्षकों के कारण है। शिक्षा व्यवस्था की वजह से दुनिया भारत को जानती है। शिक्षकों ने अपने शिष्यों के जरिए हर सवाल का जवाब दिया। विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया। ऋषि सांदीपनि ने कृष्ण को कर्मयोगी बनाया।
सरकार का मतलब सहकार
सीएम बोले कि सरकार का मतलब सहकार भी होता है। सहकार से ही सरकार बनती है। अगर सरकार सब वर्गों का ध्यान न रखे तो वह सरकार नहीं कहलाती। हम पीएम मोदी के नेतृत्व में काम कर रहे हैं।
शिक्षकों को श्रेय
मोहन यादव ने कहा कि हम सब छात्रों का नंबर शिक्षकों ने लगाया। जब हमारी सरकार बनी तो खजाना खाली बताया गया। हमने व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ आर्थिक रूप से सक्षम बनाया। आज मध्य प्रदेश सबसे कम बेरोजगारी वाला प्रदेश है।
सांदीपनि विद्यालय की तारीफ
सीएम ने सांदीपनि विद्यालय की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सांदीपनि स्कूल देखकर 56 इंच का सीना हो जाता है। देश में इतने अच्छे स्कूल कहीं नहीं। आने वाले समय में 200 सांदीपनि स्कूल और बनेंगे।
नई शिक्षा नीति पर मंत्री उदय प्रताप सिंह
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति को नीचे उतारने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है। सरकार और अधिकारी अकेले यह नहीं कर सकते। शिक्षकों से ही बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित होगी।