International Cheetah Day : मध्य प्रदेश। दुनिया के सबसे तेज जानवर चीते को बचाने की मुहिम में भारत एक नया कदम बढ़ा रहा है। अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के खास मौके पर गुरुवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो नेशनल पार्क पहुंचकर मादा चीता वीरा और उसके दो 10 महीने के शावकों को खुले जंगल में रिलीज करेंगे। यह कार्यक्रम प्रोजेक्ट चीता की तीन साल की सफल यात्रा का प्रतीक बनेगा। वीरा, जो नामीबिया से नहीं बल्कि दक्षिण अफ्रीका से फरवरी 2023 में लाई गई थी, ने फरवरी 2025 में इन दो शावकों को जन्म दिया था। दोनों शावक स्वस्थ हैं और अब वे मां के साथ प्राकृतिक जीवन जी सकेंगे।
मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे हेलीकॉप्टर से कूनो पहुंचेंगे। कार्यक्रम पर्यावरण के अनुकूल तरीके से आयोजित किया जा रहा है। श्योपुर और शिवपुरी जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने पहले ही हेलीपैड, सुरक्षा इंतजाम और रिलीज पॉइंट का दौरा कर सभी व्यवस्थाओं का जायजा ले लिया है।
वन विभाग ने उन्नत रेडियो ट्रैकिंग सिस्टम लगाया है, जिससे चीतों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। विशेष निगरानी टीम भी तैनात रहेगी, ताकि वीरा और शावक आसानी से जंगल में घुल-मिल सकें। रिलीज पॉइंट के रूप में कूनो के पर्यटन क्षेत्र में स्थित परोंद फॉरेस्ट को चुना गया है, जहां चीते पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेंगे।
यह रिलीज कूनो में चीतों को और स्वतंत्र बनाने का प्रयास है। पार्क में अभी 29 चीते हैं, जिनमें से 16 पहले से ही खुले जंगल में घूम रहे हैं। रिलीज के बाद ये तीन चीते भी जंगली जीवन में ढल जाएंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री 2026 का कूनो नेशनल पार्क कैलेंडर जारी करेंगे, जो चीतों की खूबसूरत तस्वीरों से सजा होगा।
साथ ही, खुले जंगल में घूमने वाले चीतों के क्लिनिकल मैनेजमेंट पर बने फील्ड मैनुअल को भी लॉन्च करेंगे। यह मैनुअल चीतों की स्वास्थ्य जांच और देखभाल के लिए वन अधिकारियों का मार्गदर्शक बनेगा। इसके अलावा, पार्क में बनी नई स्मृति चिन्ह दुकान का उद्घाटन होगा, जो पर्यटकों को चीता थीम वाले उत्पाद बेचेगी और स्थानीय कारीगरों को रोजगार देगी।
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। उनके जन्मदिन पर नामीबिया से 8 चीतों को कूनो लाया गया। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते जोड़े गए। आज कूनो और गांधीसागर अभयारण्य मिलाकर कुल 32 चीते हैं। पिछले तीन सालों में पांच मादा चीतों ने छह बार शावकों को जन्म दिया है।
यह उपलब्धि वैज्ञानिकों के लिए बड़ी सफलता है, क्योंकि चीतों की प्रजनन दर सामान्यतः कम होती है। नवंबर 2025 तक भारत में 32 चीते पहुंच चुके हैं, जिसमें गांधीसागर में 3 चीते भी शामिल हैं। नवंबर में एक मादा चीते मुहकी ने दूसरी पीढ़ी के 5 शावकों को जन्म देकर मील का पत्थर रचा।
अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस हर साल 4 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन 2010 में चीता कंजर्वेशन फंड की संस्थापक डॉ. लॉरी मार्कर ने शुरू किया था। यह उनके द्वारा पाले गए चीता खयाम की याद में है, जो 4 दिसंबर को पैदा हुआ था।
खयाम ने डॉ. मार्कर को चीतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। आज यह दिन चीतों के विलुप्त होने के खतरे पर जागरूकता फैलाता है। दुनिया में केवल 7,000 से कम चीते बचे हैं, जो आवास हानि और शिकार से खतरे में हैं। भारत का प्रोजेक्ट चीता इस दिशा में वैश्विक मिसाल है।