Rajgarh Urea Crisis : राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में रबी फसल की बुआई के समय यूरिया खाद की भारी कमी से हजारों किसान बेहद परेशान हैं। रबी सीजन शुरू होने के साथ ही खाद की मांग चरम पर पहुंच गई है, लेकिन सरकारी सहकारी समितियों में स्टॉक न होने से किसानों को रोज लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। शुक्रवार को तीसरे दिन भी खिलचीपुर के बस स्टैंड के पास कृषक सहकारी विपणन समिति के बाहर सैकड़ों किसानों की भीड़ लग गई। सुबह होते ही कार्यालय के बाहर कतारें बन गईं। किसान अपने आधार कार्ड और जमीन की पट्टी की फोटोकॉपियां जमीन पर रखकर लाइन में लगे रहे, लेकिन दुकान के पंपलेट पर लिखा देखा कि आज यूरिया उपलब्ध नहीं है और दुकान बंद रहेगी। फिर भी उम्मीद में वे घंटों इंतजार करते रहे।
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यह समस्या पिछले तीन दिनों से जारी है। गांवों से दूर-दूर से आए किसान, जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं, सुबह से शाम तक खड़े रहते हैं। धामन्दा गांव की केसरबाई ने बताया कि वह तीन दिन से खिलचीपुर आ रही हैं। हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है।
उन्होंने कहा, “रबी की बुआई रुक गई है। बिना यूरिया के फसल कैसे लगेगी? परिवार का पेट पालने के लिए ही तो खेती करते हैं, लेकिन यह संकट हमें तोड़ रहा है।”
वहीं, गादिया कलां के किसान मदन सिंह ने गुस्से में कहा, “मैं सुबह 6 बजे से आता हूं और शाम तक खड़ा रहता हूं। स्टाफ रोज कहता है कि गाड़ी नहीं आई, स्टॉक खत्म है। लगता है कहीं और बेचा जा रहा है। पेट्रोल का खर्चा अलग से हो रहा है। आज तीसरा दिन है, फिर भी कुछ नहीं मिला।”
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किसानों का गुस्सा अब हद पार कर चुका है। गुरुवार को खिलचीपुर में ही खाद लेने की होड़ में कुछ किसानों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जो बहस में बदल गई और फिर मारपीट तक पहुंच गई।
इस घटना का वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में दिख रहा है कि सड़क के बीच में एक किसान को कुछ लोग लात-घूंसे मार रहे हैं।
किसानों का कहना है कि भीड़ बढ़ने पर ऐसी झड़पें आम हो जाती हैं। एक किसान ने कहा, “हम सब भूखे-प्यासे इंतजार करते हैं, लेकिन जब कुछ नहीं मिलता तो गुस्सा फूट पड़ता है। कालाबाजारी हो रही है, सरकारी खाद काली बाजार में महंगे दामों पर बिकी जा रही है।”
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यह समस्या सिर्फ राजगढ़ तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के कई जिलों जैसे गुना, खंडवा और शिवपुरी में भी यूरिया और डीएपी की किल्लत की खबरें आ रही हैं।
केंद्र सरकार दावा करती है कि देश में यूरिया का कोई संकट नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राज्य सरकार ने हाल ही में 20 रैक यूरिया और 31 रैक डीएपी की खेप भेजने की घोषणा की है, जो प्रभावित जिलों में वितरित होगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि 1 अक्टूबर से नवंबर तक 7.3 लाख मीट्रिक टन यूरिया का वितरण हो चुका है, जो पिछले साल से ज्यादा है। फिर भी, किसान संगठन कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई और तत्काल स्टॉक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य रखें और निजी दुकानों पर महंगी खाद न खरीदें। रबी सब्सिडी योजना के तहत 30 नवंबर तक बीज और खाद पर अनुदान उपलब्ध है, लेकिन यूरिया संकट बरकरार है तो फसल प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है।