MP News : हरदा। मध्य प्रदेश की हरदा कृषि उपज मंडी में सोयाबीन किसानों को उचित दाम दिलाने के लिए मंडी बोर्ड ने सख्त कदम उठाया है। भावांतर भुगतान योजना 2025 के तहत प्रदेश के औसत मूल्य से कम बोली लगाकर सोयाबीन खरीदने वाले पांच बड़े व्यापारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई किसानों और उनके संगठनों की लगातार शिकायतों के बाद की गई है। आरोप है कि इन व्यापारियों ने 24 से 30 अक्टूबर के बीच जानबूझकर कम दाम पर बोली लगाई, जिससे किसानों को नुकसान हुआ।
मंडी बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5328 रुपये प्रति क्विंटल तय है। अगर मंडी में इससे कम दाम पर फसल बिकती है, तो अंतर की राशि सरकार सीधे किसानों के खाते में डालती है।
लेकिन कुछ व्यापारी कम बोली लगाकर योजना का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे थे। किसानों की शिकायत मिलते ही मंडी बोर्ड हरकत में आया। बोर्ड की वरिष्ठ अधिकारी सविता झानिया ने हरदा जिले की मंडियों का दौरा किया। उन्होंने नीलामी प्रक्रिया को करीब से देखा और किसानों-व्यापारियों से बातचीत की।
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इन्हे मिला नोटिस
दौरे के बाद मंडी सचिव हरनारायण भिलाला ने तुरंत एक्शन लिया। नोटिस पाने वाली फर्में हैं – बालाजी ट्रेडर्स, श्याम ट्रेडर्स, वर्धमान ट्रेडर्स, सांवरिया ट्रेडर्स और विजय शंकर रविशंकर। इन सभी को 7-10 दिनों में अपना पक्ष रखने के लिए लिखित जवाब देना होगा।
अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो इनका लाइसेंस रद्द हो सकता है या भारी जुर्माना लग सकता है। अब तक योजना के तहत हरदा सहित प्रदेश भर में 5 हजार से ज्यादा किसानों से सोयाबीन की खरीदी हो चुकी है। कुल 47 हजार टन से अधिक उपज खरीदी गई है।
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व्यापारियों की सफाई कुछ और है। उनका कहना है कि इस बार बेमौसम बारिश से सोयाबीन में नमी की मात्रा ज्यादा थी। खेत से सीधे मंडी लाई गई फसल गीली होने के कारण दाम कम लगे। सूखी और साफ फसल को तो अच्छे भाव मिले हैं।
व्यापारी संगठनों ने कहा कि नमी की वजह से क्वालिटी प्रभावित हुई, इसलिए बोली कम लगानी पड़ी। लेकिन मंडी बोर्ड ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि योजना के नियम साफ हैं – औसत मूल्य से कम बोली नहीं लग सकती।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भावांतर योजना को किसान हितैषी बताया है। योजना में 9.36 लाख से ज्यादा किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। 24 अक्टूबर से खरीदी शुरू हुई जो 15 जनवरी 2026 तक चलेगी।
हर 15 दिन में मॉडल रेट जारी होता है और अंतर की राशि DBT से किसानों के खाते में आती है। मंडी बोर्ड ने हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम भी शुरू किया है ताकि कोई शिकायत हो तो तुरंत कार्रवाई हो।
हरदा के किसान रामस्वरूप पटेल ने कहा, “हमारी फसल की मेहनत का सही दाम मिलना चाहिए। नोटिस से व्यापारियों में डर बैठेगा।” इधर मंडी बोर्ड ने सभी जिलों को अलर्ट जारी किया है कि ऐसी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।