Latest

Supreme Court News : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CJI गवई पर जूता फेंकने वाले वकील पर अवमानना कार्रवाई नहीं

Supreme Court

Supreme Court News : नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कोई कार्रवाई नहीं होगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि ऐसी कार्रवाई से आरोपी को अनचाही प्रसिद्धि मिलेगी। घटना को बेवजह महत्व दिया जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत में जूता फेंकना या नारे लगाना अवमानना है। लेकिन कार्रवाई संबंधित जज पर निर्भर करती है। इस मामले में CJI गवई ने खुद सख्त कदम उठाने से इनकार कर दिया था। इसलिए कोर्ट ने अवमानना याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर यह सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी पक्ष रखा। लेकिन बेंच ने कहा कि CJI का माफ करना ही अंतिम है।

Bhopal News : ज्ञानवापी जज को ‘काफिर’ कहने वाला भोपाल का आतंकी, सीए स्टूडेंट बना ISIS का सोशल मीडिया हैंडलर

सुनवाई में कोर्ट ने चिंता जताई कि सोशल मीडिया पर ऐसी घटनाओं का महिमामंडन हो रहा है। इससे अदालत की गरिमा प्रभावित होती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए दिशानिर्देश बनाए जाएंगे। तुषार मेहता से देशभर की अदालतों में ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट मांगी गई। बेंच ने कहा कि सोशल मीडिया पर अनियमित प्रसार से बचाव के उपाय जरूरी हैं।

यह घटना 6 अक्टूबर 2025 को हुई थी। CJI गवई की कोर्ट में एक PIL सुनवाई के दौरान राकेश किशोर ने जूता फेंकने की कोशिश की। वह चिल्लाया, “सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं।” जूता CJI तक नहीं पहुंचा। CJI ने शांत रहकर सुनवाई जारी रखी।

Bihar Election 2025 : BJP और कांग्रेस की स्टार प्रचारक सूची जारी, PM मोदी से लेकर दिग्विजय सिंह तक, प्रचार युद्ध शुरू

कहा, “ये चीजें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।” बाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने किशोर को सस्पेंड कर दिया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सदस्यता रद्द की। एंट्री कार्ड जब्त कर लिया। किशोर ने कहा कि उसे कोई पछतावा नहीं। यह सनातन धर्म के अपमान के विरोध में था।

राकेश किशोर (71) दिल्ली के मयूर विहार के रहने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य। घटना से पहले खजुराहो में क्षतिग्रस्त विष्णु मूर्ति की बहाली पर CJI की टिप्पणी विवादास्पद रही। CJI ने कहा था, “मूर्ति से पूछ लो कि वह खुद को बहाल करे।” इससे किशोर आहत हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CJI से बात की। घटना को निंदनीय बताया।

MP Crime News : नोटरी शादी के बाद दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला, 6 साल बाद आरोपी ने ठुकराई शादी

यह फैसला न्यायिक गरिमा पर जोर देता है। कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता अभिव्यक्ति महत्वपूर्ण है। लेकिन यह दूसरों की गरिमा पर असर न डाले। दिशानिर्देश जल्द बनेंगे। तुषार मेहता रिपोर्ट देंगे। यह कदम अदालतों में अनुशासन बढ़ाएगा। वकीलों को सतर्क रहना होगा। सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी बरतनी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *