Sehore Land Scam : सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के जिला पंजीयक उप पंजीयक कार्यालय ने एक ऐसा फर्जीवाड़ा किया है जिसकी वजह से 200 किसानों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। सालों से जमीन के मालिक किसानों को एक दिन पता चला कि, 48 किसानों की लगभग 3500 एकड़ जमीन की जिला पंजीयक उप पंजीयक कार्यालय सीहोर ने फर्जी रजिस्ट्रियां कर दीं। ये करोड़ों की जमीनें पीएसीएल कंपनी की सहयोगी कंपनियों के नाम कर दी गई, जबकि किसानों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
दरअसल, मार्च 2023 में खुलासा हुआ कि रेहटी तहसील के 48 किसानों की लगभग 3,500 एकड़ जमीन की फर्जी रजिस्ट्रियां 2013-14 में की गईं। ये करोड़ों की उपजाऊ भूमियां PACL (पंजाब एग्रीकल्चरल कॉलोनी लिमिटेड) की सहयोगी कंपनियों- जैसे मोसोनीरी डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड – के नाम कर दी गईं।
किसानों को भनक तक न लगी। फर्जी स्टांप पेपर, गवाहों के असली नाम लेकिन फोटो चेंज – यह सब अधिकारियों, तहसील कर्मचारियों और रजिस्ट्री वेंडर्स की सांठगांठ से हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई, लेकिन किसानों की लड़ाई जारी है। यह घोटाला मध्य प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड की कमजोरी को उजागर करता है।
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2023 में बंटवारे के लिए पहुंचे किसान
यह काला खेल तब सामने आया, जब सगोनिया गांव के किसान अपनी जमीन के बंटवारे के लिए उप पंजीयक कार्यालय गए। उन्हें बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘बिक्री’ पर रोक लगा रखी है। जांच में पता चला कि 2013-14 में फर्जी रजिस्ट्रियां हो चुकी हैं।
गवाहों और किसानों के नाम तो असली रखे गए, लेकिन फोटो फर्जी लगाए गए। फर्जी स्टांप पेपर से शासन को करोड़ों का चूना लगाया। किसान विजय सिंह यदुवंशी ने कहा, “हमारी जमीनें PACL कंपनियों के नाम हो गईं। वे क्रेडिट स्कोर बढ़ाने के लिए इस्तेमाल हुईं। जब PACL घोटाला फूटा, तो सेबी ने जांच की।”
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फर्जी रजिस्ट्री से शेयर बेचे
PACL 2014-15 का पोंजी स्कीम था, जहां 58 लाख निवेशकों को 4,000 करोड़ का चूना लगाया। SEBI ने 2015 में रोक लगाई। सीहोर की जमीनें PACL की सहयोगी कंपनियों को ट्रांसफर कर शेयर मार्केट में बेची गईं। सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस आर.एम. लोढ़ा समिति गठित की, जिसने इन संपत्तियों पर रोक लगाई।
किसानों ने PMO, SEBI और लोढ़ा समिति को शिकायत की। वकील सुनील दुबे और तन्मय यादव ने पैरवी की, जिससे कुछ किसानों को राहत मिली। लेकिन कई मामले लंबित हैं।
अभिषेक सिंह, प्रतिभा कुम्भारे, चंद्रभान साहू पर संदेह
फर्जीवाड़े में तत्कालीन जिला पंजीयक अभिषेक सिंह, उप पंजीयक प्रतिभा कुम्भारे और चंद्रभान साहू की मिलीभगत संदिग्ध है। रेहटी तहसील के कर्मचारी और रजिस्ट्री वेंडर्स ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए। एक किसान ने कहा, “हमारी साइनेचर कॉपी की, लेकिन फोटो बदल दी।” जांच में 48 किसानों की 3,500 एकड़ जमीन प्रभावित पाई गई।
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किसानों ने लोढ़ा समिति, PMO और SEBI को शिकायतें भेजीं। दुबे ने कहा, “कुछ को सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिला, लेकिन PACL की संपत्तियां जब्ती की प्रक्रिया लंबी है।” 200 किसान प्रभावित हैं, जिनकी जमीनें करोड़ों की हैं। एक किसान ने कहा, “हमारी उपजाऊ भूमि कंपनियों के नाम हो गई। न्याय मिले।”