Zomato Platform Fees Increased : नई दिल्ली। ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अपने ग्राहकों के लिए खाना मंगाना थोड़ा और महंगा कर दिया है। कंपनी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 20% की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद अब हर ऑर्डर पर 12 रुपये फीस देनी होगी। पहले यह फीस 10 रुपये थी। यह नई दर देश के सभी शहरों में लागू हो चुकी है, जहां जोमैटो अपनी सेवाएं प्रदान करता है। इस बदलाव ने ग्राहकों के बीच चर्चा का माहौल बना दिया है, क्योंकि त्योहारी सीजन में खर्च पहले ही बढ़ जाता है।
फीस बढ़ाने की वजह क्या है?
त्योहारी सीजन जैसे दीवाली, नवरात्रि और अन्य उत्सवों के दौरान लोग बाहर से खाना ऑर्डर करने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं। इस समय जोमैटो के ऑर्डर्स की संख्या में भारी उछाल आता है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनी को अपने डिलीवरी सिस्टम, कर्मचारियों, और तकनीकी संसाधनों पर अतिरिक्त निवेश करना पड़ता है। इस खर्च को संतुलित करने के लिए जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस में यह बढ़ोतरी की है। कंपनी का कहना है कि यह कदम उनके सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए जरूरी है।
जोमैटो पहले भी समय-समय पर अपनी फीस में बदलाव करता रहा है। पिछले साल त्योहारी सीजन में फीस 6 रुपये से बढ़कर 10 रुपये हो गई थी, और उससे पहले यह 5 रुपये से 6 रुपये हुई थी। इस बार की 20% की बढ़ोतरी के बाद ग्राहकों को हर ऑर्डर पर 2 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।
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जोमैटो का शेयर मार्केट में प्रदर्शन
जोमैटो के शेयर ने निवेशकों को प्रभावित करना जारी रखा है। वर्तमान में कंपनी का शेयर 323 रुपये पर कारोबार कर रहा है। इस साल अब तक शेयर ने 17% का रिटर्न दिया है, जबकि पिछले 6 महीनों में यह 45% और एक साल में 30% बढ़ा है। जोमैटो की यह मजबूत वित्तीय स्थिति उसके बढ़ते कारोबार और बाजार में पकड़ को दर्शाती है।
जोमैटो की शुरुआत: फूडीबे से यूनिकॉर्न तक
दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा ने साल 2008 में फूडीबे नाम से एक फूड डायरेक्टरी वेबसाइट शुरू की थी। मात्र नौ महीनों में यह दिल्ली-एनसीआर में सबसे बड़ी रेस्टोरेंट डायरेक्टरी बन गई। 2010 में इसका नाम बदलकर जोमैटो कर दिया गया। इसके बाद कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और पुणे, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, और हैदराबाद जैसे शहरों में अपनी सेवाएं शुरू कीं।
2012 तक जोमैटो ने श्रीलंका, यूएई, कतर, दक्षिण अफ्रीका, यूके, और फिलीपींस में अपनी मौजूदगी दर्ज की। 2013 में न्यूजीलैंड, तुर्की, और ब्राजील भी इस सूची में शामिल हो गए। जोमैटो देश का पहला फूड-टेक यूनिकॉर्न बना, जिसकी वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर से अधिक है। फाइनेंशियल ईयर 2024 की पहली तिमाही में कंपनी ने 2 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।
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जोमैटो न केवल फूड डिलीवरी में अग्रणी है, बल्कि यह ग्राहकों, रेस्टोरेंट पार्टनर्स, और डिलीवरी पार्टनर्स को जोड़ने वाला एक मजबूत टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म भी है। अगस्त 2022 में दीपिंदर गोयल ने ब्लिंकिट को खरीदकर ग्रॉसरी डिलीवरी के क्षेत्र में भी कदम रखा।
स्विगी ने भी बढ़ाई फीस
जोमैटो की प्रतिद्वंद्वी कंपनी स्विगी ने भी पिछले महीने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी। स्विगी ने फीस को 12 रुपये से बढ़ाकर 14 रुपये कर दिया, जो 17% की वृद्धि है। इस तरह, दोनों बड़े फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डाला है।