ATS Investigation: भोपाल। भोपाल एटीएस की जांच में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनके बाद एजेंसियां और ज्यादा सतर्क हो गई हैं। और अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
एटीएस का दावा है कि आरोपियों के संपर्क पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से थे। वहीं, पूछताछ के दौरान ‘मिशन 2047’, युवाओं को जोड़ने और सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क बढ़ाने जैसी बातें भी सामने आई हैं।
पूछताछ में सामने आया ‘मिशन 2047’
एटीएस के तहत, बिहार से पकड़े गए इजहार उल हक ने पूछताछ में बताया कि वह और उसके कुछ साथी ‘मिशन 2047’ नाम के एक प्लान पर काम कर रहे थे। जिसमें जांच एजेंसी का दावा है कि इसका मकसद देश में पीएफआई के एजेंडे को आगे बढ़ाना था। फिलहाल एटीएस इस जानकारी की जांच कर रही है।
युवाओं को जोड़ने की थी जिम्मेदारी
इसके साथ ही पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संपर्क कर रहे थे। एटीएस का कहना है कि उन्हें अपने साथ नए लोगों को जोड़ने का काम दिया गया था। इसके लिए वॉट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था।
पाकिस्तान से जुड़े लोगों के संपर्क में थे
जांच के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे सभी सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए भारत और पाकिस्तान के कई लोगों के संपर्क में थे। एटीएस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
फराज को पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा गया था
एटीएस ने बतया कि, भोपाल के फराज को पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा गया था। उसे भरोसा दिलाया गया था कि बाद में उसे ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजा जाएगा। उसके पास से मिली कुछ किताबों और अन्य सामग्री की भी जांच की जा रही है।
सिमी और पीएफआई से जुड़े लोगों के संपर्क में था फराज
पूछताछ में फराज ने बताया कि उसकी पहचान सिमी SIMI के सदस्य अरशद बिलग्रामी से थी। फराज जिस अस्पताल में काम करता था, वहां अरशद का आना-जाना था और इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई थी। वहीं, फराज ने यह भी बताया कि पीएफआई PFI से जुड़े वसीम अख्तर ने भोपाल के एक अस्पताल में उसके साथ काम किया था, जिसके बाद दोनों संपर्क में आए थे।
डिलीट किए गए चैट और कॉल रिकॉर्ड खंगाल रही एटीएस
जांच के दौरान एटीएस को यह भी पता चला है कि आरोपी कॉल डिटेल और अलग-अलग ऐप्स की चैट हिस्ट्री डिलीट कर देते थे। अब जांच एजेंसी हटाए गए डेटा को वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है। एटीएस को उम्मीद है कि इससे नेटवर्क से जुड़े कुछ और अहम सुराग मिल सकते हैं।
एटीएस ने इजहार उल हक को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं। इस तरह की भाषा वेबसाइट पर पढ़ने वाले आम पाठकों को ज्यादा सहज और प्राकृतिक लगती है, और खबर AI की बजाय रिपोर्टर द्वारा लिखी हुई महसूस होती है।