- बड़ा तालाब से अतिक्रमण हटाने के लिए एक हफ्ते की मोहलत
- 31 से सिमटकर 8-9 वर्ग किमी रह गया भराव क्षेत्र
- अवैध फार्म हाउस और पक्के निर्माण पर सख्ती
- नया सर्वे और मास्टर प्लान बनाने की तैयारी
Bada Talab Encroachment : भोपाल। राजधानी की जीवनरेखा माने जाने वाले Upper Lake Bhopal (बड़ा तालाब) को लेकर कलेक्ट्रेट में उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठे। बैठक Alok Sharma की पहल पर बुलाई गई थी।
बैठक में जब कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने एसडीएम से तालाब किनारे शेष अतिक्रमण की स्थिति पूछी, तो अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। तीनों एसडीएम ने स्वीकार किया कि टीएंडसीपी के नक्शे के अनुसार मार्किंग तक पूरी नहीं हो पाई है।
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इस पर कलेक्टर ने एक सप्ताह की मोहलत देते हुए बड़े और स्पष्ट अतिक्रमण तत्काल हटाने के निर्देश दिए। साथ ही हर सप्ताह समीक्षा बैठक करने का निर्णय लिया गया।
31 से सिमटकर 8-9 वर्ग किमी रह गया भराव क्षेत्र
सांसद ने बैठक में कहा कि कभी 31 वर्ग किलोमीटर के भराव क्षेत्र वाला बड़ा तालाब अतिक्रमण और सूखे के कारण तेजी से सिमट रहा है। वर्तमान में इसका दायरा घटकर लगभग 8-9 वर्ग किलोमीटर रह गया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गंदे नालों का पानी सीधे तालाब में क्यों मिल रहा है, जबकि शोधन संयंत्रों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कितने नाले रोके गए और कितने अब भी प्रदूषण फैला रहे हैं इस पर भी स्पष्ट जवाब मांगा गया।
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अवैध फार्म हाउस और पक्के निर्माण पर सख्ती
तालाब किनारे बने अवैध फार्म हाउस और पक्के निर्माणों पर सांसद ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह केवल अतिक्रमण नहीं, बल्कि भोपाल की ऐतिहासिक जल धरोहर पर हमला है। कानून तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
हरित न्यायाधिकरण के आदेशों के पालन पर सवाल
बैठक में National Green Tribunal के आदेशों के पालन की स्थिति भी पूछी गई। सांसद ने भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए स्थायी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया।
भदभदा क्षेत्र में शेष झुग्गियों को लेकर भी प्रशासन से जवाब मांगा गया।
नया सर्वे और मास्टर प्लान की तैयारी
बैठक में संकेत दिए गए कि बड़ा तालाब का नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा और एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्रोत क्षेत्र को सुरक्षित रखना, सीवेज का पूरी तरह रोकथाम करना और भविष्य में किसी भी अवैध निर्माण को रोकना है।
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साफ कर दिया गया कि बड़ा तालाब के मामले में अब किसी भी तरह की ढिलाई नहीं चलेगी। एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई के ठोस परिणाम दिखाने होंगे, अन्यथा जवाबदेही तय की जाएगी।