हाइलाइट्स
- जबलपुर में NH-30 पर रेड बॉक्स मार्किंग का पहला ट्रायल
- मवेशी प्रभावित क्षेत्रों में हिंदी-अंग्रेजी में चेतावनी लिखी
- 25 लोकेशन पर 100 से ज्यादा रेड बॉक्स तैयार
- नौरादेही मॉडल पर आधारित नई पहल
- हादसे कम करने के उद्देश्य से NHAI का प्रयोग
NH30 Highway Safety : जबलपुर। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर सड़क सुरक्षा को लेकर एक नई पहल शुरू की है।
यह प्रयोग प्रदेश में पहली बार जबलपुर क्षेत्र में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य हाईवे पर बैठने वाले मवेशियों और वन्य जीवों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना है।
नौरादेही मॉडल पर आधारित पहल
इससे पहले नौरादेही टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-45 के संवेदनशील घाट क्षेत्र में रेड टेबल टॉप मार्किंग (लाल ब्लॉक) बनाई गई थी। वहां करीब 2 किलोमीटर के डेंजर जोन में लगातार यह मार्किंग की गई है।
उसी तर्ज पर अब NH-30 पर भी रेड बॉक्स बनाए गए हैं, लेकिन यहां इन्हें अलग-अलग चिन्हित स्थानों पर तैयार किया गया है।
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100 से ज्यादा रेड बॉक्स, 25 लोकेशन चिन्हित
NH-30 के करीब 150 से 200 किलोमीटर के दायरे में 25 स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां अक्सर मवेशी सड़क पर बैठे मिलते हैं।
हर लोकेशन पर चार-चार रेड बॉक्स बनाए गए हैं दो सड़क के एक तरफ और दो दूसरी तरफ। इस तरह कुल 100 से ज्यादा रेड बॉक्स तैयार किए गए हैं।
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इन रेड ब्लॉक्स का आकार 2×3 मीटर है और इन्हें थर्मोप्लास्टिक रोड मार्किंग तकनीक से बनाया गया है। बॉक्स के अंदर बड़े अक्षरों में हिंदी और अंग्रेजी में चेतावनी लिखी गई है:
“चेतावनी: मवेशी बाहुल्य क्षेत्र”
“Warning: Cattle Prone Area”
साथ ही इन स्थानों पर ट्रैफिक साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि वाहन चालकों को पहले से सतर्क किया जा सके।

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क्या दिख रहा है असर?
करीब तीन घंटे तक मौके पर निरीक्षण के दौरान यह देखा गया कि अधिकांश वाहन चालक चेतावनी पढ़कर भी गति कम करते नजर नहीं आए।
हालांकि जब ऊंचाई से देखा गया तो कम स्पीड पर रेड मार्किंग और लिखी चेतावनी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
एक ट्रक चालक ने बताया कि रात में हेडलाइट की रोशनी पड़ने पर सफेद अक्षर साफ दिखाई देते हैं और इससे सतर्कता बढ़ सकती है।
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वहीं सड़क किनारे ढाबा संचालकों का कहना है कि तेज रफ्तार वाहनों के कारण मार्किंग का असर सीमित दिखाई देता है, क्योंकि जानवर अचानक सड़क पर आ जाते हैं और हादसे हो जाते हैं।
NHAI का पक्ष: यह पहला प्रयोग
NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत लाल साहू के अनुसार, बरसात के मौसम में हाईवे पर मवेशियों के बैठने की शिकायतें अधिक मिलती हैं। ऐसे में एडवांस वार्निंग देने के लिए यह प्रयोग शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि रेड बॉक्स में रिफ्लेक्टिव कोडिंग की गई है, जिससे वाहन की लाइट पड़ते ही अक्षर चमकते हैं।
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यदि वाहन बहुत तेज गति से चल रहा है तो पूरी चेतावनी पढ़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन लाल ब्लॉक देखकर चालक को अलर्ट जरूर मिलता है।
जंगल क्षेत्र में बढ़ते हादसों के बीच कदम
जंगल और ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाले हाईवे पर वन्य जीवों और मवेशियों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह तकनीक अपनाई गई है।
जबलपुर–भोपाल मार्ग पर स्थित नौरादेही क्षेत्र में पहले से 12 किलोमीटर लंबे डेंजर जोन को विशेष डिजाइन से सुरक्षित बनाया गया है।
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अब NH-30 पर यह नया ट्रायल भविष्य में सड़क सुरक्षा के लिए मॉडल बन सकता है।
फिलहाल यह पहल जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रयोग है। इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में वाहन चालकों की सतर्कता और गति नियंत्रण पर निर्भर करेगा।