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Prakhar Vishwakarma : बुंदेलखंड के ‘मिसाइल मैन’ प्रखर विश्वकर्मा ने बनाई रियूजेबल मिसाइल ‘प्रोजेक्ट राम’, ISRO भी हैरान!

Prakhar Vishwakarma missile

Prakhar Vishwakarma : टीकमगढ़। बुंदेलखंड के छोटे से कस्बे पलेरा से निकले युवा वैज्ञानिक प्रखर विश्वकर्मा ने रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक ऐसा कमाल कर दिखाया है, जो पूरे देश को गौरवान्वित कर देगा। महज 20 साल की उम्र में इंजीनियरिंग के छात्र प्रखर ने ‘प्रोजेक्ट राम’ के तहत भारत की पहली रियूजेबल मिसाइल विकसित की है। यह मिसाइल हमला करने के बाद खुद लॉन्च पैड पर लौट आएगी, जिससे रक्षा बजट में भारी बचत होगी। और इस सफलता के पीछे छिपी है वाराणसी की साइकोलॉजी छात्रा सुहानी की अटूट प्रेरणा की कहानी।

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प्रखर विश्वकर्मा टीकमगढ़ जिले के पलेरा तहसील के लारों गांव के रहने वाले हैं। वे गवर्नमेंट मॉडल स्कूल, पलेरा से पढ़ाई कर चुके हैं और अब इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के साथ-साथ रक्षा इनोवेशन पर काम कर रहे हैं।

प्रोजेक्ट ‘राम’ (Relaunch Automatic Missile) को उन्होंने पूरी तरह उत्तर प्रदेश की धरती पर ही पेटेंट कराने और विनिर्माण करने का संकल्प लिया है। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करने वाला है। प्रखर का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश रक्षा गलियारे का प्रमुख केंद्र बने।

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मिसाइल की खासियतें वाकई लाजवाब हैं। यह रियूजेबल है, यानी एक बार इस्तेमाल के बाद फिर से तैनात की जा सकती है। हाइब्रिड तकनीक से लैस यह मिसाइल जेट इंजन और पारंपरिक मिसाइल सिस्टम का अनोखा मिश्रण है। इससे लंबी दूरी पर सटीक हमला, बेहतर मैन्यूवरिंग और जटिल परिस्थितियों में नियंत्रण मिलेगा।

प्रखर के मुताबिक, यह तकनीक रक्षा लागत को 70 प्रतिशत तक कम कर देगी। प्रोजेक्ट का 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और वे इसे आईआईटी-बीएचयू के इनोवेशन हब से जोड़ना चाहते हैं। साथ ही, डीआरडीओ और इसरो से तकनीकी समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं।

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अब बात प्रोजेक्ट ‘राम’ और सुहानी के कनेक्शन की। सुहानी पांडेयपुर, वाराणसी की रहने वाली हैं और वसंत कॉलेज फॉर वुमेन से बीए साइकोलॉजी की पढ़ाई कर रही हैं। प्रखर ने खुलासा किया, “यह प्रोजेक्ट तकनीकी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण था।

जब भी मैं हार मानने को होता, सुहानी ने साइकोलॉजी के ज्ञान से मेरा मानसिक संतुलन बनाए रखा। उसने मुझे यकीन दिलाया कि उत्तर प्रदेश से ही वैश्विक इनोवेशन संभव है। ‘राम’ का तकनीकी आधार मेरा हो सकता है, लेकिन भावनात्मक ताकत सुहानी की देन है।”

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प्रखर को ‘मिसाइल मैन ऑफ मध्य प्रदेश’ कहा जाता है। हाल ही में उरई में ‘रग रग बुंदेली’ कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया गया। वे एस्ट्रोनॉटिकल इंस्टीट्यूट में स्पीकर भी हैं और चंद्रयान-3 लॉन्च का साक्षी बने।

यह प्रोजेक्ट न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि बुंदेलखंड के युवाओं को इनोवेशन की राह दिखाएगा। प्रखर का मानना है कि सही प्रेरणा से कोई सपना असंभव नहीं।

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