MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का डिजिटाइजेशन का काम तो पूरा हो गया, लेकिन बड़ा झटका यह लगा कि करीब 2 लाख 23 हजार मतदाताओं का डेटा साल 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट से मैच ही नहीं कर रहा। इन्हें “नो मेपिंग” की श्रेणी में डाल दिया गया है। यानी इनके मौजूदा पते और पुराने रिकॉर्ड आपस में नहीं जुड़ पा रहे।
भारतीय निर्वाचन आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने स्पष्ट आदेश दिया है कि 48 घंटे के अंदर जितने भी “नो मेपिंग” वाले नाम हैं, उन्हें ठीक किया जाए। इसके बाद भोपाल जिला प्रशासन ने तुरंत री-चेकिंग अभियान शुरू कर दिया।
मंगलवार और बुधवार को पूरे दिन हजारों बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर दौड़ते नजर आए। अभी तक 15 हजार से ज्यादा नामों की दोबारा जांच हो चुकी है और नो मेपिंग का आंकड़ा घटकर करीब 2 लाख 10 हजार रह गया है।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, “SIR का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। अब हम नो मेपिंग वाले मतदाताओं को ठीक करने में जुटे हैं। जिन विधानसभाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा है, वहां अतिरिक्त टीमें भेजी गई हैं।”
उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। उससे पहले 50 दिन तक हर “नो मेपिंग” वाले मतदाता की व्यक्तिगत सुनवाई होगी।
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इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र में अतिरिक्त सहायक रजिस्ट्रेशन अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं। जिले में कुल 100 से ज्यादा अधिकारी केवल इसी काम पर लगाए गए हैं।
नए मतदाता भी इस दौरान अपना नाम जुड़वा सकेंगे। जिन मतदाताओं का डेटा बिल्कुल नहीं मिलेगा या जो वास्तव में उस पते पर नहीं रहते, उनके नाम नियमानुसार काटे जाएंगे।