Rajgarh News : मध्य प्रदेश। राजगढ़ जिले के खिलचीपुर तहसील के छोटे से गांव दरावरी में बंदर के प्रति लोगों की आस्था ने सबको हैरान कर दिया। पिछले दिनों गांव में एक बंदर की मौत हो गई थी। ग्रामीणों ने उसे हनुमानजी की बानर सेना का सदस्य मानते हुए इंसान की तरह ही पूरा अंतिम संस्कार किया और मंगलवार को ग्यारहवीं के दिन मृत्यु-भोज भी कराया।
घटना 7 नवंबर की है। जंगल से एक बंदर गांव में आया था। उछल-कूद करते समय वह ऊंचाई से गिर पड़ा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। अगले दिन 8 नवंबर को पूरा गांव इकट्ठा हुआ।
डीजे बजाया गया, डोल बनाया गया और बंदर की शव-यात्रा निकाली गई। श्मशान घाट पर लकड़ियों की चिता सजाई गई और हिंदू रीति-रिवाज से उसका दाह-संस्कार किया गया।
ग्यारहवें दिन यानी सोमवार को गांव के पटेल बीरमसिंह सौंधिया पांच पंचों के साथ बंदर की अस्थियां लेकर उज्जैन पहुंचे। क्षिप्रा नदी के किनारे पंडितों से पूरी विधि करवाई और अस्थियों का विसर्जन किया। पटेल ने बंदर के लिए अपनी दाढ़ी भी बनवा ली, जो गांव में श्राद्ध के समय की परंपरा है।
मंगलवार को गांव में भारी आयोजन हुआ। ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा किया और करीब एक लाख रुपये जमा हुए। इसी पैसे से पूड़ी, आलू-सब्जी, सेव, नमकीन, गुलाब जामुन जैसे कई स्वादिष्ट पकवान बनवाए गए।
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भोज में सिर्फ दरावरी गांव ही नहीं, आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग भी शामिल हुए। सभी ने बंदर की आत्मशांति के लिए प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण किया।
ग्रामीणों का कहना है- “बंदर बजरंगबली की सेना का सैनिक है। उसका संस्कार नहीं करते तो पाप लगता। हमने इंसान की तरह ही उसकी विदाई की ताकि हनुमानजी प्रसन्न हों और गांव पर कोई संकट न आए।”