High-Tech Wildlife Capture Operation MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश ने वन्यजीव संरक्षण में एक अनोखा कदम उठाया है। राज्य में पहली बार हाई-टेक कैप्चर अभियान चलाया गया। इसमें 846 कृष्णमृग और 67 नीलगायों को बिना चोट पहुंचाए पकड़ा गया। सभी जानवरों को सुरक्षित अभयारण्यों में छोड़ दिया गया। यह अभियान किसानों की फसलों को बचाने और वन्यजीवों की रक्षा दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
मुख्यमंत्री ने इसे ‘सेवा भाव और संरक्षण का बेमिसाल उदाहरण’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम न सिर्फ जंगली जानवरों की जान बचाता है। बल्कि किसानों की मेहनत की रक्षा भी करता है। दीपावली के दौरान भी वनकर्मियों ने रात-दिन एक कर दिया। उनकी मेहनत की मुख्यमंत्री ने खुलकर तारीफ की। यह अभियान 10 दिनों तक चला। दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम ने इसमें अहम भूमिका निभाई।
हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक ने कमाल कर दिखाया। रॉबिन्सन-44 हेलीकॉप्टर से पहले खेतों का हवाई सर्वे किया गया। फिर बोमा बाड़ लगाई गई। यह घास और जाल से बनी फनल जैसी संरचना है। जानवरों को डराए बिना उन्हें धीरे-धीरे अभयारण्य की ओर ले जाया गया। किसी जानवर को बेहोश करने की जरूरत नहीं पड़ी। इससे पूरी प्रक्रिया प्राकृतिक और सुरक्षित रही। दक्षिण अफ्रीका की कंजरवेशन सॉल्यूशंस कंपनी के 15 विशेषज्ञों ने मध्य प्रदेश की वन टीम को ट्रेनिंग दी।
पकड़े गए जानवरों को गांधीसागर, कूनो और नौरादेही अभयारण्यों में छोड़ा गया। नीलगायों को गांधीसागर के 64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बसाया गया। शाजापुर, उज्जैन और आसपास के जिलों के किसान अब राहत की सांस ले रहे हैं। पहले ये जानवर फसलें रौंद देते थे। अब ऐसी घटनाओं में भारी कमी आई है। वन विभाग ने एक ट्रेंड टीम तैयार की है। यह भविष्य में अन्य जिलों में ऐसे अभियान चला सकेगी।
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अभियान में मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक शुभरंजन सेन ने नेतृत्व किया। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक उत्तम शर्मा, मुख्य वन संरक्षक एम.आर. बघेल और विशेषज्ञ डॉ. कार्तिकेय की भूमिका सराहनीय रही। शाजापुर कलेक्टर रिजु बाफना ने बताया कि इमलीखेड़ा गांव में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट से 45 कृष्णमृग पहले ही गांधीसागर पहुंच चुके थे। यह देश का पहला ऐसा पायलट प्रोजेक्ट है। जहां हेलीकॉप्टर से हिरणों को हांका गया।
मुख्यमंत्री ने वनकर्मियों से कहा कि ‘जियो और जीने दो’ की नीति अपनाएं। यह अभियान मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने की दिशा में बड़ा कदम है। राज्य सरकार वन्यजीवों के लिए पर्याप्त भोजन और जगह सुनिश्चित कर रही है। किसानों को नुकसान से बचाने के लिए ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पूरे देश के लिए मॉडल बनेगी। वन क्षेत्रों में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।