Pachmarhi Closed Today : पचमढ़ी। मध्य प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी आज पूरी तरह बंद रहा। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के इको सेंसिटिव जोन नियमों के विरोध में यह कदम उठाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये नियम विकास को रोक रहे हैं। पचमढ़ी बचाव संघर्ष समिति ने सुबह से शाम 4 बजे तक बाजार बंद रखने का ऐलान किया था। साथ ही, नागरिकों से रैली में शामिल होने की अपील की गई।
समिति के अध्यक्ष संजय लिटवाणी ने बताया कि इको सेंसिटिव जोन का नोटिफिकेशन गलत तरीके से लागू हो रहा है। नियमों के मुताबिक, कोर क्षेत्र की जंगल सीमा से सिर्फ 100 मीटर तक जोन बनना चाहिए। लेकिन अधिकारी नक्शे और कार्रवाई में 2 किलोमीटर तक फैला रहे हैं। इससे पचमढ़ी के ज्यादातर इलाके प्रभावित हो जाएंगे। लिटवाणी ने कहा, “यह शहर को बंधक बनाने जैसा है। हम एसटीआर अधिकारियों को ज्ञापन देकर विरोध दर्ज करेंगे।”
प्रदर्शन के दौरान रैली निकाली गई। इसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। वे नारेबाजी करते हुए इको जोन के दायरे को सीमित करने की मांग कर रहे थे। बाजार बंद होने से दुकानें, रेस्तरां और छोटे होटल प्रभावित हुए। लेकिन पर्यटकों की सुविधा का ख्याल रखा गया। होटलों में रुके मेहमानों को उनके कमरों में ही खाना पहुंचाया गया। समिति ने कहा कि पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
2017 में भारत सरकार के राजपत्र में पचमढ़ी को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के इको सेंसिटिव जोन में शामिल किया गया था। अधिसूचना नंबर 2230 के तहत 1532.521 हेक्टेयर क्षेत्र कवर होता है। इसमें छावनी परिषद, साडा और संबंधित संस्थाएं आती हैं। पूरा पचमढ़ी अब इस जोन में है। कोर क्षेत्र से 1 किमी के दायरे में नए निर्माण पर पूरी तरह रोक है। एसटीआर के सहायक संचालक संजीव शर्मा ने छावनी परिषद, एसडीएम पिपरिया, साडा सीईओ और पर्यटन निगम को पत्र लिखा। उन्होंने नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा।
लिटवाणी ने पुरानी परेशानी का जिक्र किया। 17 साल से पचमढ़ी कैंट में पक्के निर्माण पर रोक थी। तीन महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट से यह रोक हटवाई गई। लेकिन अब इको जोन का बहाना बनाकर नया विवाद खड़ा कर दिया गया। शहरवासी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन स्थानीय विकास को कुर्बान नहीं किया जा सकता।
पचमढ़ी यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व का हिस्सा है। यहां बाघ, तेंदुआ और दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं। इको जोन का मकसद वन्यजीवों को बचाना है। लेकिन स्थानीय लोग चिंतित हैं कि इससे रोजगार और बुनियादी सुविधाएं प्रभावित होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवादों से संतुलन बनाना जरूरी है। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। शाम को रैली खत्म हो गई। ज्ञापन सौंप दिया गया।
Vidisha News : पुलिसकर्मी ने महिला से की मारपीट, शराब के नशे में पत्नी से विवाद, वीडियो वायरल
अब एसटीआर प्रबंधन का इंतजार है। अगर मांगें पूरी न हुईं, तो आंदोलन तेज हो सकता है। पचमढ़ी पर्यटन पर निर्भर है। ऐसे में यह विवाद पर्यटन को भी नुकसान पहुंचा सकता है। स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि लंबे समय तक बंदी बर्दाश्त नहीं। सरकार को जल्द हस्तक्षेप करना चाहिए।
