Mahakal Temple VIP Darshan : उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नई तकनीकी व्यवस्था शुरू हो गई है। अब वीआईपी श्रद्धालुओं की हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जा रही है। यह कदम अनियमितताओं को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के निर्देश पर यह सिस्टम लागू किया गया।
Acid Attack : लक्ष्मीबाई कॉलेज की छात्रा पर एसिड से हमला, दोनों हाथ झुलसे
नई व्यवस्था कैसे काम करेगी?
जब कोई वीआईपी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचता है, तो शंख द्वार पर तैनात कर्मचारी उसकी जानकारी कंप्यूटर पर गूगल डॉक्स में दर्ज करते हैं। इसमें श्रद्धालु का नाम, आने का समय, गेट नंबर, दर्शन की अवधि, साथ आए लोगों की संख्या और अनुरोध किसने किया, यह सब शामिल होता है। यह डेटा सीधे प्रशासक प्रथम कौशिक और सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के मोबाइल पर लाइव पहुंच जाता है।
इसके अलावा यह भी चेक किया जाता है कि वीआईपी को कौन रिसीव कर रहा है। दर्शन प्रक्रिया में कौन-कौन से कर्मचारी शामिल हैं। तीन अलग-अलग पॉइंट्स पर चेकिंग होती है। इनकी लाइव फीड अधिकारियों के फोन पर उपलब्ध रहती है।
Chhath Puja 2025 : छठ पूजा का तीसरा दिन आज, जानिए डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि और महत्व
सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने बताया कि दिनभर में प्रोटोकॉल दर्शन करने वालों की संख्या, नंदी हॉल से जलद्वार तक की व्यवस्था और पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग हो रही है। यह सिस्टम अक्टूबर के पहले हफ्ते से चालू है। अब तक इसके अच्छे नतीजे मिले हैं।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
महाकालेश्वर मंदिर में सालाना लाखों श्रद्धालु आते हैं। इनमें जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पुलिसकर्मी, न्यायिक अधिकारी और मीडिया वाले शामिल होते हैं। प्रोटोकॉल दर्शन के लिए 250 रुपये प्रति व्यक्ति दान अनिवार्य है। लेकिन पिछले साल कई गड़बड़ियां सामने आईं।
जांच में पाया गया कि कई बार ज्यादा लोग दर्शन कर लिए जाते थे। अवैध एंट्री कराई जाती थी। कर्मचारियों पर पैसे के लेन-देन के आरोप लगे। इसी को रोकने के लिए मंदिर समिति ने प्रोटोकॉल व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बना दिया। इसका मकसद पारदर्शिता लाना और अवैध वसूली बंद करना है।
10 महीने पहले खुलासा
करीब 10 महीने पहले मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर बड़ा घोटाला पकड़ा गया। उत्तर प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं से 1100 से 2000 रुपये तक वसूले जाते थे। जांच में पता चला कि कुछ कर्मचारी, पुरोहित और गार्ड इसमें शामिल थे। मंदिर समिति ने 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। छह कर्मचारियों को निलंबित किया गया।