MP News : उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में दीवाली के बाद गोवर्धन पूजा और पड़वा पर्व पर पारंपरिक पाड़ों की लड़ाई ने धूम मचा रखी है। भूखी माता चौराहे के पास आयोजित इस दंगल में शहर और आसपास के गांवों से हजारों दर्शक जुट रहे हैं। डीजे, ढोल-ताशे और बैंड की धुन पर सजे पाड़ों को मैदान में उतारा जाता है। शुक्रवार को हुई भिड़ंत में एक पाड़े का सींग टूट गया। आयोजक रोशन यादव ने खुद इसका वीडियो जारी किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है। आयोजकों का कहना है कि इसकी शुरुआत का सटीक इतिहास किसी को नहीं पता। लेकिन उज्जैन और ग्रामीण इलाकों में यह आज भी जीवंत है। पहले यह भाई दूज से पड़वा तक सीमित रहती थी।
अब यह एक हफ्ते से एक महीने तक चलती है। इस बार करीब 50 जोड़ों की लड़ाई का प्लान है। दर्शकों में उत्साह का माहौल रहता है। लोग खाने-पीने का सामान लेकर आते हैं। शुक्रवार और शनिवार को कुल 8 जोड़ों के मुकाबले हुए।
सबसे पहले शंकर और भीमा की जोड़ी उतरी। फिर जानी-बाबा बनाम चौधरी-गेंदीया की रोमांचक टक्कर देखी गई। लालपुर क्षेत्र में शिव-जीत और शनि-जलवा के बीच भी कड़ी भिड़ंत हुई। एक मुकाबला करीब आधा घंटा चला। इस दौरान एक पाड़े का सींग टूट गया। उसे तुरंत मैदान से बाहर ले जाया गया। दर्शकों ने तालियां बजाकर समर्थन किया।
आयोजक रोशन यादव ने बताया कि पाड़ों की तैयारी दो महीने पहले शुरू हो जाती है। रोजाना 25 किलो देसी घी, 20 लीटर दूध, सरसों का तेल, देसी अंडे और काजू-बादाम से मालिश की जाती है। पौष्टिक आहार देकर उन्हें ताकतवर बनाया जाता है।
आयोजक यादव कहते हैं, “यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। पाड़े स्वस्थ रहें, तो लड़ाई रोमांचक बनती है।” आयोजन में कोई पशु क्रूरता नहीं होती। जीतने वाले पाड़े को पुरस्कार मिलता है।
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हाल ही में एचबीटीवी न्यूज ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें पाड़ों की तैयारी और भिड़ंत दिखाई गई। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। दर्शक कमेंट्स में परंपरा की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन कुछ लोग पशु कल्याण का मुद्दा उठा रहे हैं। आयोजक स्पष्ट करते हैं कि यह पारंपरिक खेल है। पशुओं की देखभाल पहले की जाती है।