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Nauradehi Sanctuary : नौरादेही अभयारण्य में चीतों का नया घर, NTCA ने जारी किए 4 करोड़

Nauradehi Sanctuary

Nauradehi Sanctuary : भोपाल। मध्य प्रदेश का नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य चीतों के लिए तीसरा सुरक्षित ठिकाना बनेगा। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के नाम से जाना जाने वाला यह अभयारण्य चीतों की नई आबादी के लिए तैयार हो रहा है।

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने सेंट्रल कैंपा फंड से पहली किस्त के रूप में 4 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। अगली किस्त में 3 करोड़ और मिलेंगे। यह कदम कूनो नेशनल पार्क के बाद चीतों के संरक्षण को मजबूत करेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि 2026 तक चीते यहां पहुंच सकते हैं।

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चीतों के लिए बेस्ट रेंज चुनी गईं

नौरादेही के सिंघपुर, मोहली और झापा फॉरेस्ट रेंज को चीतों के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया। NTCA की टीम जल्द इन रेंज का दौरा करेगी। सागर और दमोह जिले में फैले इन जंगलों में 4 क्वारैंटाइन बोमा और 1 सॉफ्ट रिलीज बोमा बनाए जाएंगे। फेंसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर का काम तुरंत शुरू होगा। सिंघपुर रेंज को क्वारैंटाइन साइट के रूप में चुना जा सकता है। अभयारण्य 1975 से अस्तित्व में है। यह 50 से 70 चीतों को आसानी से आश्रय दे सकता है। जंगल घने नहीं हैं। इससे चीतों की तेज दौड़ में कोई रुकावट नहीं आएगी। शिकार की उपलब्धता भी भरपूर है।

13 गांवों का पुनर्वास जरूरी

इन तीन रेंज में कुल 13 गांव हैं। इनके लोगों को बाहर बसाने का प्लान है। 30 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ेबंदी होगी। पुनर्वास के लिए 150 करोड़ रुपये अतिरिक्त मांगे गए हैं। अभयारण्य में कुल 93 गांव थे। 44 को पहले ही स्थानांतरित कर दिया गया। 49 गांव बाकी हैं। वन विभाग अभी तीन गांवों का काम कर रहा है। मोहली सहित सात गांवों को इस साल के अंत तक पुनर्वास के लिए चुना जाएगा। पशु चिकित्सकों की तैनाती भी होगी। रिक्त पद भरेंगे। इससे अभयारण्य की सुरक्षा बढ़ेगी।

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चीतों का भारत में सफर

भारत में चीते 1952 में विलुप्त हो गए थे। सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीते लाए गए। फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और आए। सभी को कूनो में रखा गया। कुल 20 चीते शुरू हुए। दो सालों में 26 शावक पैदा हुए। लेकिन 19 ही बचे। अब 12 वयस्क और 19 शावक हैं। कुल 31 चीते भारत में हैं। अप्रैल 2025 में दक्षिण अफ्रीका से आए दो नर चीते पवन और प्रभास को गांधी सागर अभयारण्य भेजा गया। वहां बड़ी बिल्लियों के लिए दूसरा घर तैयार हो रहा है।

अगर अफ्रीका से नया बैच नहीं आया, तो कूनो के शावक जो 2026 तक वयस्क हो जाएंगे, उन्हें नौरादेही शिफ्ट किया जाएगा। नामीबिया, बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधिमंडल ने जून-सितंबर 2025 में भारत का दौरा किया। 2025 के अंत तक 8-10 नए चीते आने की उम्मीद है। इससे चीतों की आबादी बढ़ेगी।

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परियोजना का महत्व

यह परियोजना पर्यावरण के लिए बड़ी है। चीतों का पुनर्वास जैव विविधता को बचाएगा। मध्य प्रदेश सरकार ने 2010 से इसकी तैयारी की। पहले गांवों की संख्या ज्यादा होने से योजना रुकी। अब 150 करोड़ के साथ पुनर्वास तेज होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग स्थानों पर चीते रखने से आनुवंशिक विविधता बनी रहेगी। NTCA ने नौरादेही को प्राथमिकता दी। इससे राज्य का संरक्षण मॉडल मजबूत बनेगा।

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