Vidisha News : विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार (3 अक्टूबर 2025) को 69 वर्षीय बुजुर्ग मन्नो बाई परिहार की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गंजबासौदा के पास सिरावदा गांव की रहने वाली मन्नो को चार दिन पहले मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने “बेहतर इलाज” का हवाला देकर उन्हें विदिशा के निजी अरेरा अस्पताल रेफर कर दिया।
यहाँ तीन दिनों में परिजनों से 2 लाख नकद और आयुष्मान कार्ड से 1.5 लाख वसूले गए। मरीज की हालत बिगड़ने पर भोपाल रेफर करने की मांग पर डॉक्टरों ने टालमटोल की।
शुक्रवार को एम्बुलेंस न मिलने पर निजी साधन से भोपाल ले जाते समय रास्ते में मन्नो की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही और निजी अस्पतालों से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए मेडिकल कॉलेज में हंगामा किया।
मेडिकल कॉलेज से निजी रेफर
सिरावदा गांव के लखन परिहार की मां मन्नो बाई को चार दिन पहले सांस लेने में तकलीफ के कारण विदिशा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बेटी पप्पी बाई ने बताया, “डॉक्टरों ने कहा कि यहाँ सुविधा कम है, अरेरा के निजी अस्पताल में बेहतर इलाज होगा।”
अरेरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ तीन दिनों में 2 लाख नकद और आयुष्मान कार्ड से 1.5 लाख वसूले गए। पप्पी ने कहा, “डॉक्टरों ने खून चढ़ाया, लेकिन हालत बिगड़ी। भोपाल रेफर करने को कहा, लेकिन एम्बुलेंस न मिली। निजी गाड़ी से ले गए, रास्ते में मां ने दम तोड़ दिया।”
परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर निजी अस्पतालों से सांठगांठ कर मरीज भेजते हैं, ताकि दोनों जगह पैसे वसूले जाएं। पप्पी ने रोते हुए कहा, “मां गरीब थी, आयुष्मान कार्ड था। फिर भी लूटा। डॉक्टरों ने ‘पेट में जहर फैल जाएगा’ का डर दिखाया।” मन्नो की मौत के बाद परिजन बिना पोस्टमॉर्टम शव ले गए।
मेडिकल कॉलेज में नारेबाजी
मौत की सूचना पर परिजन मेडिकल कॉलेज पहुँचे और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। आधे घंटे चले हंगामे के बाद मन्नो को जांच के लिए ले जाया गया, जहाँ मृत घोषित किया गया। परिजनों ने उच्च स्तरीय जांच और दोषी डॉक्टरों-दलालों पर कार्रवाई की मांग की।
अरेरा अस्पताल के प्रभारी पहलवान सिंह रघुवंशी ने सफाई दी, “मन्नो को तीन दिन पहले भर्ती किया गया। परिजनों ने कहा कि आराम नहीं लग रहा, भोपाल ले जाना चाहते हैं। हमीदिया रेफर किया। कोई लूट नहीं।”