MP News : भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय नौकरियों में 26 जनवरी 2001 से लागू दो बच्चों की पाबंदी को हटाने का फैसला किया है। इस नीति को जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा, जिसके बाद तीसरी संतान होने पर भी किसी अधिकारी या कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स में मंत्रालय सूत्रों के हवाले से बताया गया हैकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संकेतों और उच्च स्तरीय निर्देशों के बाद यह कवायद शुरू हुई।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) 2019-20 के अनुसार, मध्य प्रदेश की प्रजनन दर 2.9 है, जो राष्ट्रीय औसत 2.1 से अधिक है। छत्तीसगढ़ (2017) और राजस्थान (2016) पहले ही यह शर्त हटा चुके हैं। इस बदलाव से मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल और उच्च शिक्षा विभागों में लंबित 8-10 हजार केस समाप्त होंगे। यह नीति न केवल कर्मचारियों को राहत देगी।
24 साल पुरानी नीति का अंत
26 जनवरी 2001 को लागू इस नियम के तहत, शासकीय कर्मचारियों को तीसरी संतान होने पर नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता था। इस नीति ने कई कर्मचारियों को मुश्किल में डाला। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, RSS प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने कम से कम तीन बच्चों की वकालत की, ने इस बदलाव को गति दी। भागवत ने कहा था, “2.1 की प्रजनन दर बनाए रखने के लिए औसतन तीन बच्चे जरूरी हैं।” उच्च स्तर पर सहमति के बाद अब कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा।
तीसरी संतान के केस स्वतः समाप्त
नई व्यवस्था लागू होने पर तीसरी संतान से जुड़े सभी लंबित केस (न्यायालय और विभागीय जांच) स्वतः समाप्त हो जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग में मेडिकल एजुकेशन से 12 शिकायतें लंबित हैं।
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हालांकि, 2001 के बाद जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी या बर्खास्तगी हुई, उनके केस दोबारा नहीं खुलेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह नीति भविष्य के लिए है, पुराने मामलों पर असर नहीं।” एक जज सहित कई कर्मचारी इस नियम के कारण नौकरी गँवा चुके हैं।
मेडिकल और शिक्षा में सबसे ज्यादा शिकायतें
सबसे अधिक प्रभाव मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभागों पर पड़ेगा। अनुमान है कि 8,000-10,000 केस इन विभागों से हैं। मेडिकल एजुकेशन में 12 मामले सामान्य प्रशासन तक पहुँचे। कर्मचारी संगठनों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। एक कर्मचारी ने कहा, “तीसरी संतान पर नौकरी का डर खत्म होगा।”
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छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पहले हट चुकी पाबंदी
पड़ोसी राज्यों ने यह पाबंदी पहले हटा दी थी। राजस्थान ने 11 मई 2016 और छत्तीसगढ़ ने 14 जुलाई 2017 को नियम खत्म किया। वहाँ कर्मचारी तीन बच्चों के साथ नौकरी कर रहे हैं। MP की प्रजनन दर 2.9 (शहरी 2.1, ग्रामीण 2.8) राष्ट्रीय औसत 2.1 से अधिक है। बिहार (3.0) और मेघालय (2.9) के बाद MP का स्थान है। भोपाल में दर 2.0, पन्ना (4.1), शिवपुरी (4.0), बड़वानी (3.9) में उच्च।
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने एक माह पहले कहा था, “जनसंख्या नीति में 2.1 दर जरूरी। तीन बच्चे होने चाहिए, इससे अधिक नहीं।” यह बयान नीति बदलाव का आधार बना। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि RSS के संकेतों ने सरकार को प्रेरित किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव जनसंख्या वृद्धि और कर्मचारी कल्याण को संतुलित करेगा।