Sehore News : सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में मतदाता नामावली के विशेष सघन पुनरीक्षण कार्य 2025 में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ा एक्शन लिया गया है। सोमवार को एसडीएम तन्मय वर्मा ने छतरपुरा के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) प्रवीण श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया, जबकि पांच अन्य बीएलओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
यह कार्रवाई 2003 और 2025 की मतदाता सूची की डेटा मैपिंग में देरी के चलते हुई, जो मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देशों का उल्लंघन है। विपक्षी दलों के फर्जी मतदाताओं और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों के बीच यह कदम जिले में निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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एक निलंबन, पांच को नोटिस
एसडीएम तन्मय वर्मा ने मतदाता नामावली मैपिंग कार्य में लापरवाही बरतने के लिए सीहोर विधानसभा के ग्राम छतरपुरा के बीएलओ प्रवीण श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन का कारण समय पर डेटा उपलब्ध न कराना और कार्य में लापरवाही बताया गया।
इसके अलावा, पांच अन्य बीएलओ—पूनमचंद तिवारी (ग्राम बरखेड़ा हसन), धरमसिंह वर्मा (ग्राम जानपुर बावडिया), गोविंद सिंह झलावा (ग्राम शेखपुरा), सुनील गिरोठिया (मतदान केंद्र क्रमांक 240, सीहोर), और विश्वजीत राय (मुंगावली)—को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। इन बीएलओ पर भी मैपिंग डेटा समय पर जमा न करने का आरोप है।
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सीहोर तहसीलदार अमित सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के 12 सितंबर 2025 के पत्र के आधार पर की गई, जिसमें 2003 और 2025 की मतदाता सूची की मैपिंग का कार्य 19 सितंबर तक पूरा करने के निर्देश थे।
हालांकि, समयसीमा बाद में बढ़ाई गई, लेकिन कई बीएलओ ने डेटा जमा नहीं किया। तहसीलदार ने स्पष्ट किया, “पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है और यह प्रक्रिया कई चरणों में चलेगी। जो लापरवाही करेंगे, उनके खिलाफ सख्ती जारी रहेगी।” निलंबन और नोटिस की कार्रवाई को जिला प्रशासन ने सख्त संदेश के रूप में लिया है, ताकि बाकी बीएलओ समय पर कार्य पूरा करें।
विपक्ष का हंगामा
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने सत्तारूढ़ बीजेपी और निर्वाचन आयोग पर फर्जी मतदाताओं और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों में कहा गया कि कई मतदान केंद्रों पर फर्जी नाम जोड़े गए हैं, और पुरानी मतदाता सूची में हेरफेर की जा रही है।
इन शिकायतों के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्य प्रदेश ने सभी कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर 2003 की मतदाता सूची के साथ 2025 की सूची का मिलान करने के निर्देश दिए। इस मैपिंग का मकसद डुप्लिकेट, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं को हटाकर सूची को शुद्ध करना है।