Bear Attack Pachmarhi News : पचमढ़ी। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के पचमढ़ी क्षेत्र में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के काजीघाट जंगल में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात (23-24 सितंबर 2025) को एक दर्दनाक घटना घटी। नींबूखट गांव के आदिवासी शंकरलाल नर्रे (उम्र 55 वर्ष) पर फीमेल भालू ने हमला कर दिया। शंकरलाल लुहान (पेड़ों की लार) और गोंद इकट्ठा करने गए थे, जब भालू ने उन पर झपट्टा मारा।
घायल शंकरलाल रातभर जंगल में दर्द से कराहते रहे। बुधवार सुबह उनकी पत्नी ने पचमढ़ी पहुंचकर ग्रामीणों को सूचना दी। वनकर्मियों और ग्रामीणों ने बल्ली-चादर की डोली बनाकर 5 किलोमीटर पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर उन्हें बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के बाद नर्मदापुरम जिला अस्पताल रेफर किया गया।
लुहान इकट्ठा करने गई शाम, रातभर का दर्द
शंकरलाल नर्रे और उनकी बुजुर्ग पत्नी मंगलवार दोपहर काजीघाट जंगल में लुहान और गोंद इकट्ठा करने गए थे। यह आदिवासी समुदाय का पारंपरिक आजीविका स्रोत है, जहां पेड़ों से निकलने वाली लार और गोंद को बाजार में बेचा जाता है।
शाम ढलते ही वे एक पेड़ के पास पहुंचे, जहां फीमेल भालू अपने दो बच्चों के साथ थी। शंकरलाल ने बताया, “मैं पेड़ पर चढ़ने ही वाला था कि भालू ने पीछे से हमला कर दिया। उसने पैर पकड़ लिया। मैंने धक्का देकर छुड़ाया, लेकिन वह घायल हो गया।”
भालू के हमले से शंकरलाल का पैर फैक्चर हो गया और वे चलने में असमर्थ हो गए। रातभर जंगल में अंधेरे में दर्द से तड़पते रहे। पत्नी ने उन्हें संभाला, लेकिन मदद के लिए चिल्लाती रहीं। सुबह होते ही पत्नी पैदल पचमढ़ी के नींबूखट गांव पहुंची और ग्रामीणों को जगाया। शंकरलाल का परिवार गरीब है, और जंगल ही उनकी जीविका का आधार है।
बल्ली- चादर की डोली में 5 किमी पैदल
सूचना मिलते ही नींबूखट के ग्रामीण और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के वनकर्मी हरकत में आ गए। सहायक संचालक संजीव शर्मा ने बताया, “घायल आदिवासी जंगल में लुहान इकट्ठा करने गया था। हमले की खबर सुबह मिली। फॉरेस्ट नाकेदार प्रवीण मिश्रा, फिरोज खान, चौकीदार ललित और बुधवान समेत ग्रामीणों ने बल्ली-चादर से डोली बनाई। 5 किलोमीटर पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर उन्हें बाहर लाए।”
पचमढ़ी सिविल अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद शंकरलाल को नर्मदापुरम जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों ने कहा, “पैर का फैक्चर गंभीर है, लेकिन जान खतरे से बाहर है।” ग्रामीणों ने वन विभाग की तारीफ की, लेकिन कहा कि जंगल में आदिवासियों के लिए सुरक्षा उपाय कम हैं।
पचमढ़ी और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगलों में भालू, तेंदुए और सांपों के हमले आम हो गए हैं। सहायक संचालक संजीव शर्मा ने कहा, “भालू अपने बच्चों के साथ थे, इसलिए आक्रामक हो गए। आदिवासी जंगल पर निर्भर हैं, लेकिन जागरूकता की कमी से खतरा बढ़ता है।”