Kamran Qureshi Arrested : राजगढ़। आज के दौर में सोशल मीडिया एक तलवार की धार की तरह है एक तरफ यह दुनिया को जोड़ता है, तो दूसरी तरफ कट्टर विचारधाराओं का जहर फैलाने का माध्यम भी बन जाता है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक युवक को गिरफ्तार किया, जो भारत के भगोड़े इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक के वीडियो देखकर कट्टरपंथी बना था। त्योहारों के मौसम में बड़े शहरों में ब्लास्ट की साजिश रच रहे इस टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ होते ही पूरे देश में सनसनी फैल गई। आइए जानते हैं कि कैसे एक साधारण सा लगने वाला युवक आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बना…।
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 10 सितंबर की सुबह करीब 5:30 बजे ब्यावरा के शहीद कॉलोनी में एक मकान पर छापा मारा। मुंह ढंके हुए पुलिसकर्मियों ने अचानक दरवाजा तोड़कर अंदर घुसेड़ा और बिस्तर से खींचकर कामरान कुरैशी उर्फ समर खान को गिरफ्तार कर लिया। उसके मोबाइल फोन को जब्त कर लिया गया, साथ ही घर में रखी कुछ धार्मिक किताबें भी ली गईं।
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परिवार के सदस्यों ने बताया कि वे कुछ समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है। कामरान के पिता अब्दुल रशीद ने दर्द भरी आवाज में कहा, “मेरे बेटे को जाल बिछाकर फंसाया गया है। वह तो हमसे 100 रुपये भी मांगता था, अगर गलत कामों में लिप्त होता तो ऐसा क्यों करता?”
गजवा-ए-हिंद की विचारधारा को देते थे बढ़ावा
पूछताछ में कामरान ने कबूल किया कि वह जाकिर नाइक के वीडियो देखकर ब्रेनवॉश हो गया था। नाइक के अलावा, वॉट्सएप ग्रुप में तारिक मसूद, तारिक जमील और इसरार अहमद जैसे कट्टरपंथी मौलवियों के वीडियो शेयर किए जाते थे, जो गजवा-ए-हिंद (भारत पर इस्लामिक विजय) की विचारधारा को बढ़ावा देते थे।
टेरर मॉड्यूल का हेड था असरार दानिश
दिल्ली पुलिस ने प्रेसवार्ता में बताया कि कामरान कुरैशी असरार दानिश के संपर्क में आया, जो पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर चलने वाले इस टेरर मॉड्यूल का हेड था। दानिश को ग्रुप में ‘सीईओ’ कहा जाता था। दानिश ने कामरान को पैसे देकर नए सदस्य बनाने और खिलाफत (इस्लामिक राज्य) से जुड़ी ट्रेनिंग एक्टिविटी के लिए जमीन खरीदने की योजना बनाई थी। यह मॉड्यूल आईएसआईएस से प्रेरित था और बड़े शहरों में विस्फोट की साजिश रच रहा था।
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दिल्ली पुलिस ने पैन-इंडिया ऑपरेशन चलाकर कुल 5 आतंकियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया। इसमें दिल्ली से आफताब नासिर कुरैशी और सूफियान अबूबकर, झारखंड के रांची से असरार दानिश, तेलंगाना के निजामाबाद से हूजैफा यामन और मध्य प्रदेश के ब्यावरा से कामरान शामिल हैं।
दानिश के पास से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने का सामान जैसे सल्फर पाउडर, बॉल बेयरिंग, मदरबोर्ड, हथियार और रसायन बरामद हुए। पुलिस के अनुसार, यह मॉड्यूल पाकिस्तान-आधारित हैंडलर से एन्क्रिप्टेड चैट के जरिए निर्देश ले रहा था। दानिश ने युवाओं को बरगलाकर नेटवर्क में जोड़ा और ‘खिलाफत जोन’ बनाने की योजना थी।
क्या बोले कामरान के पिता अब्दुल रशीद
कामरान के पिता अब्दुल रशीद ने बताया कि कामरान उनका छोटा बेटा है, जिसने 12वीं तक पढ़ाई की। वह कभी मैकेनिक की दुकान पर हाथ बंटाता, तो कभी शहर के वकील शादाब के यहां 4-5 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करता। शाम को लैब में जाता और रात 10:30 या 12 बजे घर लौटता। पिता कहते हैं, “वह ज्यादा किसी से बात नहीं करता था। कुछ समय से जमात के संपर्क में आया था, लेकिन वहां सिर्फ अल्लाह के बारे में बातें होती थीं, कोई गलत शिक्षा नहीं।”
अगर पता होता कि वह ऑनलाइन कट्टरपंथी ग्रुप्स से जुड़ा है, तो हम खुद रोकते। परिवार में बड़ा बेटा दिव्यांग है, बेटियां शादीशुदा हैं (जिनमें से एक तलाकशुदा और घर पर रहती है), और रशीद खुद घुटनों व कमर की दर्द से जूझ रहे हैं। कामरान की शादी के लिए लड़की देख ली थी, रिश्ता तय होने वाला था, लेकिन यह घटना सब कुछ उजाड़ गई।
स्थानीय थाने में बेटे के अपहरण की शिकायत की
दिल्ली पुलिस के जाने के बाद परिवार ने स्थानीय थाने में बेटे के अपहरण की शिकायत की। पुलिस ने बयान दर्ज किए और दिनभर तलाश की। टोल प्लाजा के सीसीटीवी से तीन गाड़ियों के गुजरने की पुष्टि हुई, जिससे शक हुआ कि यह जांच एजेंसी की कार्रवाई है।
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शाम 7 बजे दिल्ली पुलिस सिटी थाने पहुंची और विधिवत गिरफ्तारी दर्ज की। पूछताछ में झारखंड से पकड़े गए आफताब नासिर कुरैशी के बयानों से कामरान का नाम सामने आया। उसके मोबाइल से संदिग्ध चैट और डाटा मिले।
भारत में खिलाफत मॉडल कर रहे थे खड़ा
11 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहां स्पेशल सेल के एडिशनल कमिश्नर प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि यह ऑपरेशन दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना और कर्नाटक पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से चला। मॉड्यूल का मकसद भारत में खिलाफत मॉडल खड़ा करना था।
पाक हैंडलर ने हथियार डिजाइन, आईईडी बनाने के निर्देश और वैचारिक मार्गदर्शन दिया। गिरफ्तार आतंकियों को 12 दिनों की पुलिस कस्टडी मिली है, और पूछताछ जारी है। यह कार्रवाई त्योहारों से पहले संभावित हमले को नाकाम करने में सफल रही।