MP Government will Again take Loan of 4 Thousand Crores : भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार आज (9 सितंबर 2025) एक बार फिर 4,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज तीन हिस्सों में लिया जाएगा, जिसमें दो कर्ज 1,500-1,500 करोड़ रुपये और एक कर्ज 1,000 करोड़ रुपये का होगा।
इससे पहले 26 अगस्त को सरकार ने 4,800 करोड़ रुपये का कर्ज बाजार से लिया था। इस नई उधारी के बाद, चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 31,900 करोड़ रुपये हो जाएगा, और राज्य पर कुल बकाया कर्ज 4,53,640.27 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा।
कर्ज का उपयोग और उद्देश्य
सरकार ने बताया कि इस धनराशि का उपयोग लाड़ली बहना योजना की किस्तों, 17 सितंबर से शुरू होने वाले सेवा पर्व के आयोजनों और विभिन्न बड़ी परियोजनाओं के भुगतान के लिए किया जाएगा। सेवा पर्व, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा, में स्वच्छता, स्वास्थ्य शिविर, और जनकल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित होगा।
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तीन किश्तों में लिया जाएगा लोन
यह कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के माध्यम से लिया जा रहा है, जो तीन किस्तों में लिया जाएगा।
- 1. पहला कर्ज: 1,500 करोड़ रुपये, 17 साल की अवधि (सितंबर 2042 तक), ब्याज का भुगतान हर 6 महीने में।
- 2. दूसरा कर्ज: 1,500 करोड़ रुपये, 19 साल की अवधि (सितंबर 2044 तक), ब्याज का भुगतान हर 6 महीने में।
- 3. तीसरा कर्ज: 1,000 करोड़ रुपये, नवंबर 2021 के कर्ज का पुनर्जारीकरण (री-इश्यू), 20 साल की अवधि (2041 तक)। इन कर्जों की राशि सरकार को 10 सितंबर को प्राप्त होगी।
राज्य का कुल कर्ज
31 मार्च 2025 तक मध्यप्रदेश पर कुल बकाया कर्ज 4,21,740.27 करोड़ रुपये था। आज के कर्ज के बाद यह राशि बढ़कर 4,53,640.27 करोड़ रुपये हो जाएगी। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने मई, जून, जुलाई और अगस्त में कई बार कर्ज लिया है। इस वित्त वर्ष में अब तक का कुल कर्ज 31,900 करोड़ रुपये हो चुका है।
कर्ज लेने का समय और राशि
- 7 मई: 2,500 + 2,500 करोड़ रुपये (12 और 14 साल की अवधि, 2037 और 2039 तक)।
- 4 जून : 2,000 + 2,500 करोड़ रुपये (16 और 18 साल की अवधि)।
- 8 जुलाई: 2,500 + 2,300 करोड़ रुपये (16 और 18 साल की अवधि)।
- 30 जुलाई: 4,300 करोड़ रुपये (17 और 23 साल की अवधि)।
- 5 अगस्त: 4,000 करोड़ रुपये (18, 20, और 23 साल की अवधि)।
- 26 अगस्त: 2,500 + 2,300 करोड़ रुपये (20 और 18 साल की अवधि)।
- 9 सितंबर: 1,500 + 1,500 + 1,000 करोड़ रुपये (17, 19 और 20 साल की अवधि)।
सरकार का राजस्व अधिशेष का दावा
मोहन सरकार ने दावा किया कि वह कर्ज सीमा के भीतर ही ले रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने 2,34,026.05 करोड़ रुपये की आय और 2,21,538.27 करोड़ रुपये का खर्च दर्ज किया, जिससे 12,487.78 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष रहा।
वित्त वर्ष 2024-25 के संशोधित अनुमान के अनुसार, आय 2,62,009.01 करोड़ रुपये और खर्च 2,60,983.10 करोड़ रुपये होने की संभावना है, जिससे 1,025.91 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष अनुमानित है।
विपक्ष ने सरकार की लगातार कर्ज लेने की नीति पर सवाल उठाए हैं, विशेष रूप से तब जब कुल कर्ज 4.53 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। उनका कहना है कि यह भविष्य की पीढ़ियों पर बोझ डालेगा। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कर्ज विकास परियोजनाओं और जनकल्याण योजनाओं के लिए जरूरी है।