झूलती 11 केवी लाइनों के विरोध में 25 गांवों के किसान पानी में उतरे
सीहोर में झूलती 11 केवी बिजली लाइनों को लेकर 25 गांवों के 500 से ज्यादा किसानों ने जल सत्याग्रह किया। किसानों ने हादसों का हवाला देते हुए जिम्मेदार विद्युत अधिकारियों पर एफआईआर और कार्रवाई की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

Sehore Farmers’ Water Satyagraha: खेतों और गांवों के ऊपर से गुजर रही कथित रूप से झुकी हुई 11 केवी बिजली लाइनों को लेकर सीहोर में किसानों का विरोध तेज हो गया है। करीब 25 गांवों से जुटे 500 से ज्यादा किसानों ने नदी के पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह किया। आंदोलन की अगुवाई किसान और समाजसेवी एमएस मेवाड़ा कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि वे पिछले करीब दो महीने से बिजली लाइनों की स्थिति और कथित लापरवाही के खिलाफ अलग-अलग माध्यमों से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं। इसके बावजूद समाधान नहीं होने पर उन्होंने जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाया।
अधिकारियों को ज्ञापन देने के बाद भी नहीं बनी बात
आंदोलनकारी किसानों ने बताया कि मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रियों, कमिश्नर, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित कई अधिकारियों को शिकायत और ज्ञापन दिए जा चुके हैं। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विद्युत अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अब संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
बिजली लाइनों से हादसों का हवाला
बता दें, किसानों ने खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में नीचे लटकती 11 केवी लाइनों को लेकर सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि इन लाइनों की वजह से पहले भी हादसे हो चुके हैं। बरबेली गांव में सतीश मेवाड़ा गंभीर रूप से घायल हुए थे। वहीं क्लासकला और जामुनी में करंट की चपेट में आने से मवेशियों की भी मौत हुई हैं। इन घटनाओं का हवाला देते हुए किसान बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं।
तीन विद्युत अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
आंदोलनकारियों ने सीहोर विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री और श्यामपुर के सहायक यंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती और बिजली लाइनों से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
घायल बेटे को लेकर दिल्ली जाने की चेतावनी
वहीं, हादसे में घायल बताए जा रहे किसान सतीश मेवाड़ा के पिता पहलाद मेवाड़ा ने भी प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे अपने घायल बेटे को हाथ ठेले पर लेकर दिल्ली जाएंगे और जंतर-मंतर पर अपनी मांग उठाएंगे।
फिलहाल किसानों के जल सत्याग्रह के बाद प्रशासन और बिजली विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर आंदोलनकारियों की नजर बनी हुई है।

