MP से हरदीप पुरी निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए, हेमंत खंडेलवाल ने निर्वाचन प्रमाणपत्र प्राप्त किया
मध्यप्रदेश से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उनका निर्वाचन प्रमाणपत्र प्राप्त किया। कांग्रेस ने नामांकन में कमियां होने का दावा किया था, लेकिन आपत्तियां खारिज होने के बाद अब पार्टी हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है।


Rajya Sabha Election in MP: मध्यप्रदेश से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिए गए हैं। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस ने उनके दस्तावेजों में कई गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। इसके बाद पुरी के निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने हरदीप सिंह पुरी के निर्विरोध निर्वाचन का प्रमाणपत्र प्राप्त किया। इस चुनाव के बाद मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तस्वीर भी बदल गई है। प्रदेश की कुल 11 सीटों में अब भाजपा के 10 और कांग्रेस का एक सदस्य है। इससे पहले भाजपा के पास 9 और कांग्रेस के पास 2 सीटें थीं।
हेमंत कटारे बोले- हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेगी कांग्रेस
बता दें, उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इलेक्शन पिटीशन यानी चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। अब कांग्रेस की लीगल टीम हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करेगी। पार्टी का कहना है कि पुरी के नामांकन में बताई गई कमियों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए वह इस मामले को अदालत में चुनौती देगी।
एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट
जानकारी के अनुसार, राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 14 अक्टूबर को राज्यसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने खाली सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की। भाजपा ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इसके बाद 31 अक्टूबर को पुरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और पार्टी के अन्य नेताओं की मौजूदगी में विधानसभा पहुंचकर नामांकन दाखिल किया था।
पत्नी के नाम और विदेशी संपत्तियों की जानकारी पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
हालांकि, हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस ने शपथपत्र में कई तरह की खामियां होने का दावा किया था। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और निर्दलीय उम्मीदवारों की ओर से प्रमुख रूप से तीन आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
इनमें शपथपत्र में पत्नी के नाम का उल्लेख नहीं होने, विदेशी संपत्तियों की जानकारी अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक में देने के तरीके और जिनेवा स्थित संपत्ति का विवरण शामिल था। इसके अलावा विदेशी बैंक खातों, नोटरी सत्यापन और शपथपत्र प्रमाणित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे।
रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने पुरी को इन आपत्तियों पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। दस्तावेजों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने सभी आपत्तियां खारिज कर दीं। उनका कहना था कि जांच में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं मिला।
फॉर्म-26 नहीं लगाने पर निर्दलीय उम्मीदवार का पर्चा निरस्त
वहीं, कांग्रेस ने भाजपा उम्मीदवार के सामने निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी को समर्थन दिया था। लोहानी ने कांग्रेस विधायकों के समर्थन से नामांकन दाखिल किया, लेकिन जरूरी फॉर्म-26 शपथपत्र नहीं लगाने के कारण उनका पर्चा निरस्त कर दिया गया।
लोहानी ने दस्तावेजों की कमी पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की। वहीं, दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार कांते सायन्ना का नामांकन भी दस्तावेजों में अधूरी जानकारी के कारण खारिज कर दिया गया।
दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त होने और पुरी के खिलाफ दर्ज आपत्तियां खारिज होने के बाद मैदान में केवल हरदीप सिंह पुरी का वैध नामांकन बचा। इसी के चलते उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। अब कांग्रेस इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
