मोदी कैबिनेट में जल्द होगा बड़ा फेरबदल, नए चेहरों को मौका और कुछ मंत्रियों की होगी छुट्टी
भाजपा संगठन में बदलाव के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी तेज हो गई है। 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए करीब 6 से 7 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।
दिल्ली के सियासी गलियारों से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के संगठन में हुए बड़े बदलावों के बाद अब मोदी कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल की हलचल काफी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार अपनी टीम में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। संगठन में नई जिम्मेदारी पाने वाले कुछ मंत्रियों को 'एक व्यक्ति-एक पद' के नियम के तहत मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है, जबकि कई नए चेहरों को केंद्र सरकार में शामिल किए जाने की पूरी संभावना है।
कैबिनेट में 12 पद खाली, 6 से 7 नए मंत्रियों की एंट्री संभव
संख्या के लिहाज से देखें तो मोदी सरकार में इस समय कुल 69 मंत्री कामकाज संभाल रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस हिसाब से मंत्रिमंडल में 12 नए पद अभी खाली हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि सभी 12 पद भरने के बजाय 6 से 7 नए चेहरों को ही मौका मिलने की उम्मीद है। इन संभावित नामों में पूर्व केंद्रीय मंत्री और युवा नेता अनुराग ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक जैसे अहम राज्यों को कैबिनेट में मजबूत प्रतिनिधित्व देने पर सरकार का खास जोर रहेगा।
पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनने के बाद बढ़ा सस्पेंस
इस फेरबदल में सबसे ज्यादा नजरें वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल पर टिकी हुई हैं। उन्हें हाल ही में भाजपा का नया राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के 'एक व्यक्ति-एक पद' के सिद्धांत के चलते यह सवाल उठने लगा है कि क्या वे कैबिनेट में बने रहेंगे या सिर्फ संगठन का काम देखेंगे। हालांकि, उन्हें मंत्री पद से हटाने को लेकर अभी तक पार्टी या सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी की दोहरी जिम्मेदारी पर चर्चा
दो अन्य मंत्रियों के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का नया अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वे केंद्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हैं। ठीक इसी तरह पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और केंद्र में वित्त राज्य मंत्री भी हैं। ऐसे में संगठन और सरकार की दोहरी जिम्मेदारी के चलते उनके विभागों पर भी फैसला हो सकता है। हालांकि, यूपी के सियासी समीकरणों को देखते हुए पंकज चौधरी को सरकार में बनाए रखने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।
हरदीप पुरी का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म, विदाई की चर्चा
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के भविष्य को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है। उनका राज्यसभा कार्यकाल आगामी 25 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है। उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा या नहीं, इस पर अभी स्थिति बिल्कुल साफ नहीं है। ऐसे में चर्चा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय की कमान किसी नए नेता को सौंपी जा सकती है। हाल के दिनों में पेट्रोल और एथेनॉल से जुड़े मुद्दों को लेकर जनता के बीच उठे सवालों को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।
नितिन गडकरी के मंत्रालय को लेकर क्यों लग रहे हैं कयास?
वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के विभाग को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एथेनॉल पॉलिसी को लेकर सोशल मीडिया पर हुए विरोध के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनके मंत्रालय में कोई बदलाव होगा। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का साफ मानना है कि गडकरी जैसे कद्दावर नेता को हटाना या उनका विभाग बदलना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ उनके मजबूत रिश्ते और सरकार के बुनियादी ढांचे के विकास में उनकी अहम भूमिका को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे को मिल सकती है कैबिनेट में जगह
इस पूरे फेरबदल में महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा नाम सामने आ रहा है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि श्रीकांत शिंदे को केंद्र में मंत्री बनाकर भाजपा महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ अपने गठबंधन और सामाजिक समीकरणों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।