मामे खान की आवाज से गूंजा लाल परेड ग्राउंड, 'केसरिया बालम' और 'दमादम मस्त कलंदर' पर झूमे लोग
भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह का समापन मामे खान की शानदार प्रस्तुति के साथ हुआ। 'केसरिया बालम', 'छाप तिलक' और 'दमादम मस्त कलंदर' जैसे गीतों पर दर्शक झूमे। आखिरी दिन जनजातीय नृत्यों, देशभर की लोककलाओं, प्रदर्शनियों और व्यंजन मेले ने भी लोगों का ध्यान खींचा।


Madhya Pradesh Foundation Day Celebration: मध्यप्रदेश राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मंगलवार शाम संगीत और लोक संस्कृति का शानदार संगम देखने को मिला। राजस्थान के मशहूर लोक गायक मामे खान ने अपनी सुरीली आवाज में 'केसरिया बालम', 'छाप तिलक' और 'दमादम मस्त कलंदर' जैसे गीत पेश किए। उनकी प्रस्तुति के दौरान दर्शक तालियां बजाते और सुरों के साथ झूमते नजर आए। इस सांस्कृतिक शाम के साथ मध्यप्रदेश स्थापना दिवस का तीन दिवसीय समारोह भी संपन्न हो गया। संस्कृति संचालनालय की ओर से आयोजित 71वें स्थापना दिवस समारोह के आखिरी दिन मध्यप्रदेश के जनजातीय नृत्यों के साथ देश के अलग-अलग राज्यों की लोककलाओं ने मंच पर अपनी छाप छोड़ी।
जनजातीय नृत्यों से हुई आखिरी दिन की शुरुआत
बता दें, समारोह के अंतिम दिन की शुरुआत मध्यप्रदेश की पारंपरिक लोक और जनजातीय प्रस्तुतियों से हुई। भारिया जनजाति के भड़म और अहिराई नृत्य ने दर्शकों को प्रदेश की लोक परंपराओं से परिचित कराया। इसके बाद कोरकू समुदाय का गदली और घासी जनजाति के घसियाबाजा व डंडा नृत्य प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों में पारंपरिक वेशभूषा, संगीत और नृत्य के जरिए जनजातीय जीवन की झलक देखने को मिली। मंच पर कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को पूरे उत्साह के साथ पेश किया।
दूसरे राज्यों की लोककलाओं ने भी बांधा समां
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और राजस्थान के कलाकारों ने भी अपनी कला दिखाई। गुजरात के राठवा समुदाय का राठ नृत्य और छत्तीसगढ़ के बस्तर का माड़िया नृत्य प्रस्तुत किया गया। महाराष्ट्र के लेझिम और आंध्रप्रदेश के ओग्गु ढोलू ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। वहीं, राजस्थान के कालबेलिया समुदाय का सपेरा नृत्य और बहरूपिया कला ने कार्यक्रम में अलग रंग भर दिए।
'केसरिया बालम' से शुरू हुआ मामे खान का जादू
जानकारी के अनुसार, शाम का सबसे खास आकर्षण जैसलमेर के लोक गायक मामे खान रहे। उन्होंने 'केसरिया बालम' से अपनी प्रस्तुति शुरू की। इसके बाद 'वंदे मातरम्', 'बावरे', 'चौधरी' और 'बदरी बदरिया' जैसे गीत सुनाकर राजस्थानी लोक संगीत की रंगत बिखेरी। कार्यक्रम में सूफियाना गीतों की भी खास धूम रही। मामे खान ने 'छाप तिलक', 'सांसों की माला', 'दमादम मस्त कलंदर' और 'मेरे रश्के कमर' जैसे गीत पेश किए। इन गीतों पर दर्शक संगीत की लय के साथ झूमते दिखाई दिए।
उन्होंने 'मां तुझे सलाम', 'श्रीकृष्ण गोविंद', 'लाल पीली अखियां', 'लागी रे लगन', 'बंजारा झूम', 'तू बूंद-बूंद' और 'महादेवा शिवा ट्रिलॉजी' की प्रस्तुति भी दी। 'रेशम का रूमाल' गीत के साथ संगीत संध्या का समापन हुआ।
15 से ज्यादा पीढ़ियों से जुड़ी है संगीत की विरासत
मामे खान ऐसे परिवार से आते हैं, जहां 15 से अधिक पीढ़ियों से लोक संगीत की परंपरा चली आ रही है। उन्होंने राजस्थानी लोक गायन को देश ही नहीं, विदेशों के मंचों तक भी पहुंचाया है। साल 2022 में वे कान फिल्म समारोह के रेड कार्पेट पर पहुंचने वाले भारत के पहले लोक गायक बने थे।
प्रदर्शनियों और व्यंजन मेले में भी जुटे लोग
वहीं, तीन दिवसीय समारोह के दौरान संगीत और नृत्य के साथ कई दूसरी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। लाल परेड ग्राउंड में लगी प्रदर्शनियों, देशज व्यंजन मेले, किसान बाजार और महिला उद्यमिता मंडप में दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रही। संस्कृति संचालक एनपी नामदेव ने कलाकारों का स्वागत किया।
इस आयोजन में प्रदेश की लोक परंपराओं, जनजातीय कलाओं, पारंपरिक खानपान और विकास यात्रा को एक साथ प्रस्तुत किया गया। तीन दिनों तक चले समारोह का समापन संगीत, नृत्य और देशभर की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।
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