धनतेरस पर बजट कम है तो न हों परेशान, सोना-चांदी की जगह खरीदें ये 7 शुभ चीजें; इन वस्तुओं से रहें दूर
धनतेरस 2026 का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा। सोना-चांदी के अलावा साबुत धनिया, नई झाड़ू, मिट्टी के दीये, गोमती चक्र, अक्षत, पान के पत्ते और पीतल-तांबे के बर्तन खरीदने की परंपरा है।


Dhanteras Shopping Guide 2026: धनतेरस की खरीदारी का मतलब सिर्फ सोना-चांदी खरीदना नहीं है। अगर आपका बजट महंगी धातुएं खरीदने की इजाजत नहीं देता, तो भी आप कुछ ऐसी चीजें घर ला सकते हैं, जिन्हें परंपरा में शुभ माना गया है। साबुत धनिया, नई झाड़ू, मिट्टी के दीये और पीतल-तांबे के बर्तन जैसी चीजें भी इस त्योहार की खरीदारी का हिस्सा बन सकती हैं। वहीं, कुछ वस्तुओं को लेकर धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
6 नवंबर को मनाया जाएगा धनतेरस
बता दें, इस साल धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है। इसी वजह से लोग सोना, चांदी, बर्तन और रोजमर्रा के काम आने वाली वस्तुएं खरीदते हैं। हालांकि, त्योहार पर खरीदारी करने के लिए महंगे सामान लेना जरूरी नहीं है। कई ऐसी छोटी और उपयोगी चीजें भी हैं, जिन्हें शुभ मानकर घर लाने की परंपरा है।
धनतेरस पर खरीद सकते हैं ये 7 चीजें
1. साबुत धनिया
धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदना शुभ माना जाता है। पारंपरिक मान्यता में इसे धन और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। दिवाली की पूजा में इसे माता लक्ष्मी को अर्पित करने और बाद में तिजोरी में रखने की भी परंपरा है।
2. नई झाड़ू
इस दिन नई झाड़ू खरीदने का भी चलन है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को माता लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। इसे घर की सफाई और पुरानी गंदगी हटाने का प्रतीक माना जाता है। कई परिवार धनतेरस पर नई झाड़ू लाकर इसे घर में इस्तेमाल करना शुरू करते हैं।
3. मिट्टी के दीये
दिवाली रोशनी का त्योहार है, इसलिए धनतेरस पर मिट्टी के दीये खरीदना भी एक अच्छा विकल्प है। इन दीयों से घर और आंगन सजाए जाते हैं। परंपरा में दीपक को उजाले, शुभ शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है।
4. गोमती चक्र
गोमती चक्र को भी कई धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में शुभ माना जाता है। 11 गोमती चक्र लेकर उन्हें पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखा जा सकता है। यह एक पारंपरिक उपाय है, जिसे कुछ लोग धन-समृद्धि से जोड़ते हैं।
5. अक्षत यानी साबुत चावल
धनतेरस पर साफ और बिना टूटे चावल खरीदना भी शुभ माना जाता है। पूजा-पाठ में अक्षत का खास महत्व है। धार्मिक परंपरा में चावल को अन्न, खुशहाली और घर में बरकत का प्रतीक माना जाता है।
6. पान के पत्ते और पूजा सामग्री
त्योहार की खरीदारी में पान के पत्ते और पूजा से जुड़ा सामान भी शामिल कर सकते हैं। कई धार्मिक अनुष्ठानों में पान के पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। धनतेरस पर पूजा की तैयारी के लिए इन्हें पहले से खरीदकर रखा जा सकता है।
7. पीतल या तांबे के बर्तन
धनतेरस पर पीतल और तांबे के बर्तन खरीदने की भी पुरानी परंपरा है। अगर आप घर के लिए कोई उपयोगी सामान लेना चाहते हैं, तो इन धातुओं के बर्तन एक विकल्प हो सकते हैं। पारंपरिक सलाह के मुताबिक, नया बर्तन घर लाने पर उसमें थोड़ा पानी या चावल रख सकते हैं।
धनतेरस पर इन 4 चीजों से परहेज करने की मान्यता
वहीं, कुछ धार्मिक और वास्तु परंपराओं में धनतेरस के दिन खास तरह की वस्तुएं खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। क्योंकि, इन चीजों को खरीदने से आपके घर में सुख समृद्धि नहीं बल्कि परेशानियां शुरू हो जाती हैं।
1. लोहे और स्टील का सामान
कुछ मान्यताओं में लोहे का संबंध शनि से जोड़ा जाता है। इसी वजह से धनतेरस पर लोहे की वस्तुएं और स्टील के बर्तन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।
2. कांच के बर्तन
वास्तु से जुड़ी कुछ धारणाओं में कांच को राहु से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए कुछ लोग धनतेरस के दिन कांच के बर्तन या सजावटी सामान खरीदना टालते हैं।
3. चाकू-कैंची जैसी नुकीली चीजें
चाकू, कैंची और दूसरे धारदार सामान को लेकर भी कुछ परंपराओं में परहेज बताया गया है। मान्यता के अनुसार, त्योहार के दिन ऐसी चीजें खरीदने से बचना चाहिए।
4. काले रंग की वस्तुएं
कुछ धार्मिक मान्यताओं में धनतेरस पर काले रंग के कपड़े या दूसरी काली वस्तुएं खरीदना उचित नहीं माना जाता। इसलिए कई परिवार इस दिन खरीदारी में दूसरे रंगों को प्राथमिकता देते हैं।
खरीदारी में बजट और जरूरत का रखें ध्यान
धनतेरस पर क्या खरीदना है, यह तय करते समय अपनी जरूरत और बजट को प्राथमिकता देना जरूरी है। सोना-चांदी लेना संभव न हो, तो घर के काम आने वाली चीजें भी खरीदी जा सकती हैं। त्योहार की असली खुशी परिवार के साथ पूजा करने और मिलकर उत्सव मनाने में है।
