Guru Purnima Festival: कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, गुरु पूर्णिमा पर पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया बड़ा संदेश
Guru Purnima Festival: सीहोर के कुबेरेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को गुरु, माता-पिता और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश दिया। महोत्सव में करीब 5 लाख श्रद्धालु पहुंचे और विशेष पूजा-अर्चना में शामिल हुए।
Guru Purnima Festival: सीहोर। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सीहोर के प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। देशभर से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं के बीच कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चे गुरु का आशीर्वाद पाने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। यदि व्यक्ति अपने माता-पिता, शिक्षकों और घर के बुजुर्गों का सम्मान करता है, तो उसे गुरु की कृपा स्वतः प्राप्त होती है।
गुरु का सम्मान जीवन को देता है सही दिशा
पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में कहा कि माता-पिता, गुरु और शिक्षक जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक होते हैं। उनका सम्मान करने वाला व्यक्ति जीवन में सही दिशा, संस्कार और सफलता प्राप्त करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा करें और अपने बड़ों का आदर कभी न छोड़ें।
शिव आराधना से मिलेगा गुरु का आशीर्वाद
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा से भगवान शिव को एक लोटा जल अर्पित करता है और अपने घर के बुजुर्गों व शिक्षकों का सम्मान करता है, उस पर गुरु की विशेष कृपा बनी रहती है। उनके अनुसार सच्ची भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहार और संस्कार में भी दिखाई देनी चाहिए।
कुबेरेश्वर धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। अनुमान है कि मंगलवार को करीब 5 लाख श्रद्धालु धाम पहुंचे। सभी ने विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया और गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आशीर्वाद प्राप्त किया।
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, दीक्षा समारोह भी आकर्षण का केंद्र
मध्यप्रदेश के अलावा देश के कई राज्यों से भक्त कुबेरेश्वर धाम पहुंचे हैं। श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा पर आयोजित दीक्षा समारोह में भी शामिल हो रहे हैं। आयोजन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सेवा समिति ने भोजन, आवास और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।

